BJP-SP की मार्च में होगी अग्निपरीक्षा, जानें यूपी MLC में क्या फिर जागेगी अंतरात्मा की आवाज या PDA होगा पास?

Uttar Pradesh News: प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की तिथी आ गई है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और अंतरात्मा की आवाज सुनने की प्रक्रिया हो सकती है।
BJP-SP की मार्च में होगी अग्निपरीक्षा, जानें यूपी MLC में क्या फिर जागेगी अंतरात्मा की आवाज या PDA होगा पास?

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आगामी लोकसभा चुनाव होने से पहले उत्तर प्रदेश में 13 सीटों पर 21 मार्च को विधान परिषद चुनाव होगा। एक बार फिर सपा और भाजपा में कड़ी टक्कर का सामना होगा। अब देखना ये है कि राज्यसभा चुनाव की तरह क्या इस बार भी अंतरात्मा की आवाज सुनकर क्रॉस वोटिंग का खेल खेला जाएगा।

अंतरात्मा की आवाज

आपको बता दें कि राज्यसभा चुनाव में BJP ने जो दावं पेच चला। उसका तोड़ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के पास भी इसका तोड़ नहीं था। राज्यसभा चुनाव में सपा के 7 विधायकों ने BJP के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की और 1 विधायक विधानसभा में अनुपस्थित थीं। सपा जीतकर भी हार गई। अब हुआ यूं कि राज्यसभा चुनाव के दिन सपा विधायकों ने कहा कि "हमने अपने अंतरात्मा की आवाज सुनकर वोट दिया।"

क्या है MLC का गणित?

विधान परिषद चुनाव का चुनाव वैसे ही होता है जैसे राज्यसभा का चुनाव होता है। यहां भी हर पार्टी के विधायक आकर वोट देते हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में 13 सीटों पर चुनाव होना है ऐसे में क्रॉस वोटिंग होने की पूरी संभावना है। MLC की जिन सीटों पर चुनाव होना है उनमें से 10 सीटों पर BJP का कब्जा है। इसी के साथ सपा, बसपा और अपनी दल (एस) के पास 1 सीट है। BJP के पास कुल 288 विधायक हैं। प्रत्येक MLC उम्मीदवार को 29 वोटों की जरुरत है। ऐसे में BJP आसानी से 10 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। सत्रों के अनुसार, सपा के खाते में 3 सीटें आने का अनुमान है।

सपा-भाजपा ने कैसे फंसाया पेंच?

गौरतलब है कि इस बार राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से 10 प्रत्याशियों का चयन किया जाना था। लेकन प्रदेश में सपा ने 3 और भाजपा ने 8 प्रत्याशियों को चुनावी रण में उतार दिया। आपको बता दें कि BJP ने राज्यसभा चुनाव में 8 प्रत्याशी उतारे और सपा ने 3 उम्मीदवार उतारे राज्यसभा में कुल 10 सीटें हैं। राज्यसभा चुनाव में भाजपा 7 सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है, वहीं सपा 2 सीटों पर, सारा पेंच फंसता है 1 सीट पर दोनों दलों में से किसी एक के खाते में ही यह सीट जा सकती थी।

किसके पास कितने विधायक?

सपा से आलोक रंजन सपा के तीसरे प्रत्याशी थे। वहीं, आठवें उम्मीदवार के रूप में BJP ने उद्योगपति संजय सेठ को उतारा। 11 प्रत्याशी के इस गणित को ऐसे समझिये उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटे हैं। जिसमें से 4 सीटे खाली हैं तो बचती हैं 199, BJP के पास 252 विधायक हैं NDA में कुल 34 विधायक हैं। राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल के भी 2 विधायक NDA में शामिल हैं ऐसे में BJP के पास कुल 288 विधायकों का का समर्थन है। वहीं सपा के पास कुल 101 हैं। जिसमें से दो विधायक जेल में हैं। उनको जमानत न मिलने से 2 वोट नष्ट हो गए। सपा के खेमे में कांग्रेस से 2 और बसपा से 1 विधायक है। सपा के समर्थन में कुल विधायकों की संख्या मिलाकर 102 होता है।

सपा के 7 विधायको ने की क्रॉस वोटिंग

BJP को अपने 8 उम्मीदवारों को जिताने के लिए 296 वोटों की जरुरत थी। जैसा की हमने आपको बताया BJP के पास कुल 288 विधायक है। BJP को कुल 6 वोटों की जरुरत थी। वहीं सपा को 3 उम्मीदवार जिताने के लिए सपा को 111 विधायकों की जरुरत थी। जिसमें से 1 सपा विधायक इरफान सोलंकी जेल में हैं, वे वोट नहीं डाल सकते सपा के 7 विधायको ने क्रॉस वोटिंग कर BJP के पक्ष में वोट दिया। इसके साथ BSP के विधायक उमाशंकर सिंह ने भी BJP को वोट दिया। एक विधायक अनुपस्थित थीं। जिसके बाद सपा को 8 वोटों का नुकसान हुआ। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए हर प्रत्याशी को 37 विधायको का समर्थन की जरुरत थी। इसलिए क्रॉस वोटिंग का खेल शुरु हो गया है। BJP ने 8 सीटों पर दर्ज जीत की वहीं सपा 2 सीटों पर सिमट कर रह गई।

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