नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पिछले महीने 53 सोशल मीडिया अकाउंट्स को गलत सूचना प्रसारित करने के आरोप में चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद पुलिस ने इस मामले पर विशेष ध्यान दिया है।
सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं भ्रामक खबरें
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर महाकुंभ से जुड़े कई पुराने और फर्जी वीडियो शेयर किए गए, जिनका महाकुंभ से कोई संबंध नहीं था। 13 फरवरी को मिस्र में आग लगने की पुरानी घटना को प्रयागराज कुंभ का बताकर शेयर किया गया, वहीं पटना के एक फिल्म प्रचार कार्यक्रम के वीडियो को गलत तरीके से कुंभ से जोड़ दिया गया।
नेपाल और झारखंड की घटनाओं को कुंभ से जोड़ने की कोशिश
2 फरवरी को नेपाल की एक घटना के वीडियो को महाकुंभ में भगदड़ का बताते हुए सोशल मीडिया पर फैलाया गया। 9 फरवरी को झारखंड के धनबाद की एक घटना को लेकर दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस श्रद्धालुओं की पिटाई कर रही है। वहीं, 12 फरवरी को 2021 का एक वीडियो गाजीपुर से साझा किया गया, जिसमें झूठा दावा किया गया कि कुंभ में भगदड़ के कारण शव गंगा में तैर रहे हैं।
24 घंटे साइबर निगरानी प्रणाली लागू
महाकुंभ की सुरक्षा सुनिश्चित करने और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने 24 घंटे साइबर निगरानी प्रणाली लागू कर दी है। डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर उन लोगों की पहचान कर रही है जो फर्जी खबरें फैला रहे हैं।
50 करोड़ श्रद्धालु कर चुके हैं महाकुंभ में शिरकत
महाकुंभ 2025 दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है, जिसमें अब तक 50 करोड़ से अधिक लोग आ चुके हैं। 13 जनवरी को शुरू हुआ यह आयोजन 26 फरवरी तक चलेगा। उत्तर प्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी सच्चाई जांच लें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।




