दूल्हा-दुल्हन शादी के समय करें ये काम, दहेज के मामले में नहीं होना पड़ेगा परेशान; इलाहाबाद HC ने दी बड़ी सलाह

Allahabad High Court: जिससे दहेज उत्पीड़न के झूठे आरोपों के मामलों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
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प्रतीकात्मक फोटो raftaar.in

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दहेज उत्पीड़न केस की सुनवाई करते हुए कहा है कि शादी के समय वर और वधू को मिलने वाले गिफ्टों की उसी समय सूची बना लेना चाहिए। जिससे शादी के बाद दोनों पक्ष एक दूसरे पर दहेज उत्पीड़न के झूठे आरोप नहीं लगा पाएंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि वर वधू को मिले गिफ्टों की सूची में वर पक्ष और वधू पक्ष दोनों के हस्ताक्षर भी होने चाहिए। जिससे दहेज उत्पीड़न के झूठे आरोपों के मामलों को सुलझाने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार से दहेज प्रतिषेध अधिनियम से जुड़े नियम को लेकर सवाल पूछा

इस याचिका की अगली सुनवाई 23 मई 2024 को होनी है। साथ में ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दहेज प्रतिषेध अधिनियम से जुड़े नियम को लेकर सवाल पूछा है कि क्या उन्होंने दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतगर्त कोई नियम राज्य के लिए बनाया है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 का जिक्र करते हुए समझाया कि इसके तहत दहेज लेना या देना कानूनी अपराध है, जिसके तहत कम से कम 5 वर्ष की जेल और कम से कम 50,000 रुपये जुर्माना लग सकता है, जो बढ़कर दहेज की राशि के बराबर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, ऐसा इसके प्रावधान में है।

शादी के समय मिलने वाले गिफ्टों को दहेज के दायरे में नहीं रखा जा सकता है

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने अंकित सिंह व अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1985 का जिक्र करते हुए आदेश दिया कि इस कानून के तहत वर और वधू को शादी के समय मिलने वाले गिफ्टों की सूची बनानी चाहिए। जिससे विवाद होने की स्थिति में सब साफ हो जायेगा। यानि दहेज उत्पीड़न के झूठे आरोपों का आसानी से निपटारा होगा। जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने साफ किया कि शादी के समय मिलने वाले उपहारों यानि गिफ्टों को दहेज के दायरे में नहीं रखा जा सकता है।

इस अवस्था में कोर्ट का ही सुझाव महत्वपूर्ण है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1985 को लेकर सवाल किया है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1985 कानून का उदाहरण देते हुए, कहा कि इस अधिनियम को यह बात ध्यान में रखकर बनाया गया था कि भारत में शादियों में उपहार(गिफ्ट) देने का रिवाज है। भारत की इस परंपरा को ध्यान में रखते हुए ही उपहारों को अलग रखा गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज उत्पीड़न को रोकने के लिए दहेज प्रतिषेध अधिकारियों की तैनाती होनी चाहिए। लेकिन आज तक शादियों में इस तरह के अधिकारियों को नहीं भेजा गया है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल पूछा है कि उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया है। जबकि दहेज़ उत्पीड़न के केस बढ़ रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के 7 साल बाद तक दहेज उत्पीड़न के मामले को दायर किया जा सकता है। लेकिन ज्यादातर इस तरह के मामले कोर्ट में आते हैं, जिसमे विवाद की वजह कुछ और ही होती है। लेकिन आरोप दहेज का लगा दिया जाता है। इस अवस्था में कोर्ट का ही सुझाव महत्वपूर्ण है।

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