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सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के आलोक में पाठ्यक्रम होगा अपडेट : कुलपति

— नई शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों से विकसित शिक्षा प्रणाली वाराणसी, 27 मई (हि.स.)। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के आलोक में पाठ्यक्रम को अपडेट किया जायेगा। राष्ट्रीयता, नैतिकता,अनुशासन एवं विश्व बन्धुत्व की भावना और रोजगार परक शिक्षा के साथ विश्वविद्वयालय के पाठ्यक्रमों को तैयार कर नई शिक्षा नीति (नेशनल एजुकेशन पॉलिसी) को विश्वविद्यालय में भी शीघ्र लागू किया जायेगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय ने गुरूवार को ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के द्वारा पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने की घोषणा की गई है। इस शिक्षा नीति का उद्देश्य 21 वीं शताब्दी में हमारे देश की उन्नति तथा आवश्यकताओं के अनुकूल जनमानस को जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान करना है। यह शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों से विकसित शिक्षा प्रणाली है, जो राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक को उच्चतम गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रणाली उपलब्ध करवा कर भारत को वैश्विक पटल पर वैश्विक ज्ञान में महाशक्ति बनाकर सुदृढ़ तथा जीवंत समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान करेगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा भी समस्त विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को शैक्षिक सत्र- 2021-22 आरम्भ करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में पाठ्यक्रमों का नवीनीकरण कर विश्वविद्यालय के शैक्षिक सत्र 2021-22 आरंभ करने हेतु कटिबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राचीन भारतीय मूल्यों में निहित आदर्शों को आधार बनाकर अनेक बिंदुओं को सहेजा गया है और विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय ज्ञानरूपी प्रवाह को निरंतर 230 वर्षों से अध्ययन-अध्यापन के माध्यम से संरक्षण तथा संवर्धन करता रहा है। इसलिए यहां पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों का नवीनीकरण कर यथासंभव अपने प्राचीन ग्रंथों के पठन-पाठन के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार होगा। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले इसके लिये भी संकायध्यक्षों की एक कमेटी बनाया गया है। जो नई शिक्षा नीति के आलोक में पाठ्यक्रमों को तैयार कराएगी। नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत केन्द्र सरकार द्वारा एजुकेशन पॉलिसी में अनेकों बदलाव किये गये हैं। इसके अन्तर्गत भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाया जायेगा। शिक्षकों के गुणवत्ता के स्तर को भी बढाने के लिये नई शिक्षा नीति में कई प्रावधान किये गये हैं। कुलपति ने बताया कि यहां पर शास्त्री तीन वर्ष और चार वर्ष का होगा। जिसमें विद्यार्थी को उसके समय और सुविधा के अनुसार प्रत्येक वर्ष का क्रमश: प्रमाण पत्रीय डिप्लोमा, डिप्लोमा और डिग्री की उपाधि प्राप्त होगी। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर

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