मेरठ, 10 मई (हि.स.)। सूरजकुंड श्मशान घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह को अब पीएनजी गैस में परिवर्तित किया जाएगा। बिजेंद्र एनर्जी एंड रिसर्च सेंटर ने इसकी कार्ययोजना बनाई है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, नगर आयुक्त बंसल और बिजेंद्र एनर्जी एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक बिजेंद्र चौधरी ने सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्युत शवदाह गृह को गैस संयंत्र से चलने वाले शवदाह गृह के रूप में परिवर्तित करने की बात कही। निदेशक ने बताया कि पीएनजी गैस से चलने वाले शवदाह गृह में छह शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। शव के अंतिम संस्कार में 30 से 45 मिनट का समय लगेगा। बताया जाता है कि एक शव के अंतिम संस्कार में अब तक जहां सात मन लकड़ी लगती है। वहीं पीएनजी गैस से चलने वाले शवदाह गृह में एक शव के अंतिम संस्कार में सिर्फ 40 किलो लकड़ी लगेगी। इसी के साथ हर शव की राख उसके नीचे ट्रे में इकट्ठी होगी। जिससे जहां प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ मृतकों के परिजनों को उनकी अस्थियों को एकत्र करने के लिए अधिक समय भी नहीं लगेगा। उन्होंने बताया कि विद्युत शवदाह गृह को पीएनजी से चलने वाले शवदाह गृह में तब्दील करने में लगभग दो लाख का खर्च आएगा। गंगा मोटर कमेटी के अधिकारियों ने बिजेंद्र एनर्जी एंड रिसर्च सेंटर के अधिकारियों को एडवांस मनी देते हुए जल्द से जल्द काम पूरा किए जाने के निर्देश दिए हैं। हिन्दुस्थान समाचार/कुलदीप/विद्या कान्त





