Akhilesh Yadav
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सपा ने ब्राह्मण का पत्ता किया साफ, मुस्लिम-ठाकुर-यादव को भी नहीं दिया ज्यादा महत्व; दलित-पिछड़ा पर खेला दांव

Loksabha Election 2024: उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी की जीत को रोकने के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नया सियासी प्रयोग किया है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी की जीत को रोकने के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नया सियासी प्रयोग किया है। इसके लिए अखिलेश यादव इस बार दलित और पिछड़ा(D-P) समीकरण का प्रयोग कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है, उसी से उनके इस नए सियासी प्रयोग का पता चलता है। इसके अनुसार अबकी बार समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण को जगह नहीं दिया, वहीं ठाकुर और मुस्लिम उम्मीदवार को भी हाफ कर दिया। यह समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का बड़ा दांव है। जो उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। सपा कांग्रेस के गठबंधन के साथ साथ लोकसभा चुनाव 2024 के लिए यह सामाजिक प्रयोग भी कर रही है।

अखिलेश यादव ने आपकी बार D-P( दलित-पिछड़ा) का सामाजिक प्रयोग किया है

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस गठबंधन के साथ सीट शेयरिंग में 17 सीट कांग्रेस को दी और 63 सीट उसके खाते में आयी। जिसमे से एक सीट सपा ने भदोही टीएमसी के लिए छोड़ दी है। अब सपा के पास 62 सीट बची है। जिसमे से समाजवादी पार्टी ने 47 लोकसभा सीट पर अपने उम्मीदवार उतार दिए है। अगर इन उम्मीदवारों का समीकरण देखा जाये तो पता चलता है कि अखिलेश यादव ने आपकी बार D-P( दलित-पिछड़ा) का सामाजिक प्रयोग किया है। सपा ने 47 में से 24 लोकसभा चुनाव का टिकट ओबीसी समुदाय के प्रत्याशियों को, 14 दलित समुदाय के प्रत्याशियों को , 4 सवर्ण समुदाय के प्रत्याशियों को, 3 मुस्लिम समुदाय के प्रत्याशियों को और 2 खत्री (पंजाबी) समुदाय के प्रत्याशियों को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया है।

ओबीसी और दलित नेताओं को सियासी अहमियत देने का काम किया है

सपा के उम्मीदवारों की मौजूदा सूची देखें तो अखिलेश यादव ने ब्राह्मण समुदाय को जगह नहीं दी है। उनकी जगह ओबीसी और दलित नेताओं को सियासी अहमियत देने का काम किया है। इसके उम्मीदवारों की सूची के अनुसार ठाकुर समुदाय को भी अखिलेश यादव ने कोई ज्यादा अहमियत नहीं दी है, उन्होंने ठाकुर उम्मीदवारों की संख्या भी हाफ कर दी है। सपा का वोट बैंक रहे यादव, ठाकुर और मुस्लिम को इस बार ज्यादा अहमियत नहीं दी गई है। सपा ने इस मौजूदा उम्मीदवारों की सूची के अनुसार मुस्लिम समुदाय का टिकट भी हाफ कर दिया है।

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