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महाशिवरात्रि पर्व पर भोलेनाथ के जयकारों से गूंजे शिवालय, भक्तों में दिखा उत्साह

झांसी, 11 मार्च(हि.स.)। वीरांगना नगरी झांसी में गुरूवार को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिवालयों में सुबह से ही शिवभक्तों का जमावड़ा लगा रहा और मंदिर भगवान शिव के जयकारों से गुंजायमान रहे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के इन्तजामात भी चाक चैबंद नजर आये। शिव भक्तों ने भूतभावन भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हुए हर हर महादेव, ओम् नमः शिवाय के महामंत्रों का उच्चारण करते हुए मंदिरों को गुंजायमान रखा। चारों तरफ शिव मंदिरों में भक्त ही भक्त नजर आये। दीक्षित बाग स्थित महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर, पानी वाली धर्मशाला, मढ़िया महादेव सहित तमाम शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। दीक्षित बाग स्थित महादेव मंदिर का महानगरवासियों के जीवन में अपना विशेष महत्व है। इन अति प्राचीन मंदिरों से लोगों की आस्था बहुत गहराई से जुड़ी है। बताया जाता है कि किले के मंदिर में महारानी लक्ष्मीबाई भी भगवाग भोलेनाथ की पूजा अर्चना के लिए यहां आती थीं। सिद्धेश्वर मंदिर भी भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है जहां भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए सुबह से ही लोगों का जमावड़ा रहा। पानी वाली धर्मशाला और मढिया महादेव के मंदिरों में भी भक्त अपने आराध्य के जलाभिषेक के लिए आतुर नजर आये। सिद्धेश्वर मंदिर के पुजारी और महानगर धर्माचार्य डा. हरिओम पाठक ने बताया कि झांसी की रानी महारानी लक्ष्मीबाई भगवान शिव की पुजारिन थीं, इसलिए महानगर में शिवरात्रि का विशेष महत्व है। रानी झांसी न्याय की प्रति समर्पित थीं और भगवान शिव की ही प्रेरणा से उन्होंने पानी वाली धर्मशाला स्थित हरिहरेश्वर मंदिर में पांच शिवलिंगों की स्थापना भी करवाई थी। हमारे यहां न्याय के लिए पंचपरमेश्वर कहा था है इन्हीं पंचपरमेश्वर के रूप में रानी ने हरिहरेश्वर मंदिर में पांच शिवलिंगों की स्थापना करायी थी यह इस बात का भी द्योतक है कि झांसी का राजवंश न्याय के लिए समर्पित रहा और यह न्याय की धरती रही। हमारी संस्कृति में भगवान शिव को न्याय के देवता के रूप में माना गया है। रानी झांसी ने भी इसी रूप में उन्हें देखा। यह भी बताया जाता है कि रानी के समक्ष कभी न्याय के दौरान अगर ऐसी स्थिति आती थी कि वह निर्णय नहीं ले पाती थीं तो वह पूरे मामले को लिखकर पंचपमेश्वर के समक्ष रात में रख देतीं थी और सुबह उसमें कुछ ऐसा बदलाव उन्हें मिलता था जिससे रानी को विषय विशेष में न्याय करने में सहायता मिलती थी। महाशिवरात्रि पर किले के अंदर स्थित शिव मंदिर पर विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया गया और सुबह से ही किला आमलोगों के लिए खुला रहा। इस दौरान यहां पर मेले का भी आयोजन किया गया। इस कारण किले में भी सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा नजर आया। एक ओर भक्त मंदिरों की ओर निकल रहे थे तो दूसरी ओर पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था में चैकस नजर आया। मंदिरों और किले में सुरक्षा व्यबस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/महेश

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