नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज़ हो गई हैं। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सरकार जल्द ही नए मंत्रियों को शामिल कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में छह तक नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं और इसमें तीसरे उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति भी हो सकती है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान कैबिनेट में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 60 है। ऐसे में खाली पदों को भरने के लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी संभव है।
तीसरे उपमुख्यमंत्री के लिए प्रमुख दावेदार
सूत्र बताते हैं कि तीसरे उपमुख्यमंत्री के पद के लिए पूर्व सांसद साध्वी निरंजन ज्योति सबसे मजबूत दावेदार हैं। यदि उनका चयन होता है, तो यह पद अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के नेता को दिया जाएगा। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री के दो पदों पर OBC से केशव प्रसाद मौर्य और ब्राह्मण से बृजेश पाठक हैं। तीसरे उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति से सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मंत्रिमंडल में हो सकता है सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन
भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी OBC समुदाय से आते हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सरकार इस अवसर का उपयोग राजनीतिक संतुलन बनाए रखने और पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय का विश्वास जीतने के लिए कर सकती है। इस दिशा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी चर्चित है। वह पहले योगी कैबिनेट में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी यूपी के जाट मतदाताओं में उनका असर बना हुआ है।
इसके अलावा, कैबिनेट विस्तार में बीजेपी के बागी नेताओं, समाजवादी पार्टी से बागी हुए नेताओं और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) एवं अपना दल के प्रतिनिधियों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूजा पाल, मनोज पांडेय और महेंद्र सिंह जैसे नेता इस सूची में शामिल हो सकते हैं।
राजनीतिक समीकरणों पर रहेगा असर
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस मंत्रिमंडल विस्तार से सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों में संतुलन आएगा और आगामी चुनावों में सरकार को रणनीतिक लाभ मिलेगा। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मंत्रिमंडल में नए नामों को शामिल करना न सिर्फ संगठन के भीतर तालमेल बनाएगा, बल्कि राज्य के विभिन्न समुदायों को भी राजनीतिक भरोसा देगा।
राज्य मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है।





