बीपीसीएल कम्पनी ऑक्सीजन सिलेंडर आपूर्ति को तैयार प्रयागराज, 25 अप्रैल (हि.स.)। कोविड-19 के चलते इन दिनों आक्सीजन के सिलेंडर के लिए हायतौबा मची है। इस कमी को पूरा करने के लिए प्रतिदिन पांच हजार ऑक्सीजन सिलेंडर बनाने की क्षमता रखने वाली भारत पम्पस् एंड कम्प्रेशर्स लिमिटेड (बीपीसीएल) को एक बार फिर चालू कराने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि नैनी स्थित मे. भारत पम्पस् एंड कम्प्रेशर्स लिमिटेड हैवी ड्यूटी पम्पस्, कम्प्रेशर्स तथा ऑक्सीजन सिलिण्डर के उत्पादन की सम्पूर्ण भारत में एकमात्र सार्वजनिक उपक्रम है। संस्थान में इस समय लगभग तीन हजार सेमी फिनिस्ड अवस्था में ऑक्सीजन सिलेंडर्स तैयार हैं, जो कुछ मशीनिंग कार्य के उपरांत उपयोग के लिए तैयार हो जायेगा। बीपीसीएल बचाओ संघर्ष समिति की एक बैठक रविवार को शिवेन्द्र सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई। जिसमें कहा गया कि केन्द्र सरकार ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति पूरे देश में सुनिश्चित कराने के लिए प्रयासरत है। उप्र में इस आपूर्ति की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह पर है। कंपनी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए सरकार के सहयोग में खड़ा होना चाह रही है। जिसके लिए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने नीति आयोग को भी पत्र के माध्यम से अवगत कराया है। यदि केन्द्र सरकार संस्थान को बी.एच.ई.एल द्वारा चलाने का आदेश देती है तो यह संस्थान ओएनजीसी, एनपीसीआईएल, आईओसीएल इत्यादि को पम्पस् व कम्प्रेशर्स आपूर्ति के साथ साथ आक्सीजन सिलिन्डर सम्पूर्ण भारत में उपलब्ध कराने में सक्षम साबित होगी। बैठक में समिति के महामंत्री ओम प्रकाश शर्मा, उपाध्यक्ष असीम सिन्हा, सत्यम अरूण, बैजनाथ बिन्द, चन्दन कुमार तथा भाजपा प्रतिनिधि महेश मधुकर व राजेश सिंह मौजूद रहे। आठ साल पहले बंद हुआ था उत्पादन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा के प्रयास से वर्ष 1969 में इस कंपनी की स्थापना की गई थी। जिसमें 2000 कर्मचारियों को रोजगार मिला था, जो उन दिनों प्रतिदिन 5000 सिलेंडर बनाने का काम करते थे। ऑक्सीजन सिलेंडर की डिमांड कम होने से आठ साल पहले इसका उत्पादन बंद कर दिया गया था। कम्प्रेशर सिलेंडर का निर्माण किया जाता था। 09 दिसम्बर 2020 में कंपनी को बंद कर दिया गया। इन दिनों ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी को पूरा करने के लिए इसका उत्पादन कार्य फिर से शुरू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उत्पादन शुरू हुआ तो दूर हो जाएगी ऑक्सीजन की कमी बीपीसीएल एम्पलाइज यूनियन के पूर्व महामंत्री आरएलडी दुबे का कहना है कि कंपनी के 70 फीसदी कर्मचारी निकल चुके हैं। इसके बावजूद आज भी कंपनी के कर्मचारियों में प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार सिलेंडर बनाने की क्षमता है। अगर सरकार की ओर से उत्पादन कार्य शुरू किया गया तो ऑक्सीजन सिलेंडर कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। कंपनी के पास वर्तमान समय में करीब 500 से अधिक सिलेंडर बने हुए पड़े हैं, जिसे फिनिशिंग करने के बाद उपलब्ध कराया जा सकता है। साथ ही कर्मचारी भी देशहित को ध्यान में रखते हुए पूरी क्षमता के साथ उत्पादन कार्य में अपना पसीना बहाने को तैयार हैं। जरूरत है भारत सरकार के आदेश की। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त




