प्रयागराज, 10 मई (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स सिप्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर कम्पनी के अध्यक्ष, सीईओ, डायरेक्टर सहित कम्पनी के पांच शीर्ष अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पूर्व कर्मचारी के वेतन बकाया भुगतान मामले को लेकर मेरठ में कम्पनी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के तहत गिरफ्तारी और विवेचना पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने वेतन भुगतान विवाद को आपस में सुलझा लेने की छूट दी है और कहा है कि आरोपों पर सात साल से अधिक सजा नहीं हो सकती। आरोप सेवा सम्बंधी है, ऐसे में पुलिस किसी भी अधिकारी का उत्पीड़न न करे और न ही अपराध की विवेचना की जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. के.जे ठाकर तथा न्यायमूर्ति अजीत सिंह की खंडपीठ ने एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजीव मुंदरा व अन्य की याचिका पर दिया है। याचीगण का कहना था कि कम्पनी का मुख्यालय कोलकाता में है और कम्पनी मेरठ में निर्माण कार्य कर रही है। कोरोना संक्रमण के कारण कार्य शिथिल है। कम्पनी का कार्यालय दिल्ली में भी है। प्रमोद कुमार सिंह ने कम्पनी से इस्तीफा दे दिया। उन्हें वेतन का एक हिस्सा दिया गया, किन्तु मांग अधिक है। वेतन विवाद में आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जा सकता। एसीजेएम मेरठ के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की गयी है। कम्पनी बातचीत को तैयार है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 08 जुलाई नियत करते हुए आपसी निपटारे की छूट दी है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/विद्या कान्त




