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कृषि विभाग कर्मचारियों को भी कोरोना फ्रंट लाइन वर्कर मानने की याचिका दायर

प्रयागराज, 28 मई (हि.स.)। कृषि विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को भी कोरोना वॉरियर्स की तरह फ्रंट लाइन वर्कर मानने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। मेरठ के छात्र रजत ऐरन ने न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ के समक्ष ईमेल से भेजे पत्र के माध्यम से प्रदेश में कृषि उत्पादन एवं कृषक कल्याण कार्यों में लगे कृषि विभाग के फील्ड कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करके प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण की मांग की है। याचिका की सुनवाई के दौरान मेरठ से वीडियो लिंक से जुड़े रजत ऐरन ने खंडपीठ को बताया कि गत वर्ष से लॉकडाउन के बावजूद कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों के खेतों तक जाकर केंद्र एवं राज्य की कृषि योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं। पंचायत चुनाव के पश्चात गांव में पैर पसार रही महामारी का सामना करते हुए कृषि विभाग कर्मचारी किसानों को उन्नत बीज, खाद, कीटाणु नाशक, खरपतवार नाशक, किसान क्रेडिट कार्ड आदि उपलब्ध करवा रहे हैं एवं कृषि की उन्नत तकनीकों से उनका परिचय भी करवा रहे हैं। जिस कारण प्रदेश अन्न का भंडार बना हुआ है। खाद्यान्न एवं दलहन की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने कृषि कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा नहीं दिया है। जिस कारण उन्हें टीकाकरण के लिए भटकना पड़ रहा है। मामले की गम्भीरता को देखते हुए खंडपीठ ने अगली सुनवाई पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/विद्या कान्त

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