नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान बुधवार तड़के भगदड़ जैसे हालात बन गए, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस घटना को लेकर चार बार बात की और स्थिति का जायजा लिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में 15 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन के मुताबिक, लगभग 35 लोग घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
कैसे हुई भगदड़?
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान महाकुंभ का सबसे बड़ा आयोजन होता है। इस साल 144 सालों के बाद ‘त्रिवेणी योग’ के दुर्लभ संयोग के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। रात लगभग दो बजे, कुंभ मेला क्षेत्र में मंत्रोच्चार और श्लोकों के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई। भीड़ अनियंत्रित हो गई और भगदड़ जैसे हालात बन गए। भगदड़ के बाद कुंभ मेला क्षेत्र में पुलिस और एंबुलेंस के सायरन गूंज उठे। घायलों को तुरंत मेला क्षेत्र के केंद्रीय अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनके परिजन भी पहुंचने लगे। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया।
पीड़ितों की जुबानी “बचने का कोई मौका नहीं था”
कर्नाटक से आई एक महिला ने रोते हुए बताया, “हम नौ लोग साथ थे, लेकिन अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई और हम फंस गए। हमें बचने का कोई मौका नहीं मिला। हर तरफ से धक्का दिया जा रहा था।” वहीं, मध्य प्रदेश के छतरपुर से आए एक व्यक्ति ने कहा कि उनकी मां घायल हो गई हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।
“लोग बस उसके ऊपर से गुजरते जा रहे थे”
सुल्तानपुर से आए बासदेव शर्मा ने बताया, “मेरे परिवार का एक सदस्य भगदड़ में कुचल गया। हमने उसे बेहोश पड़ा हुआ देखा, लेकिन भीड़ बढ़ती जा रही थी। कोई उसे बचाने के लिए नहीं रुका।” इसी तरह, राम प्रसाद यादव ने बताया, “भीड़ इतनी ज्यादा हो गई थी कि मुझे सांस लेने में परेशानी होने लगी। मैं गिर गया और इससे पहले कि मैं उठ पाता, लोग मेरे ऊपर से गुजरते गए।”
परिवार ने पुल के नीचे ली शरण
स्नान के लिए आईं देविका की आंटी बाई राजपूत इस हादसे में लापता हो गईं। देविका ने घंटों खोया-पाया केंद्रों के चक्कर काटे, लेकिन उनकी आंटी का कोई पता नहीं चला। उनका परिवार सदमे में था और थककर एक पुल के नीचे शरण लेने को मजबूर हो गया। देविका ने कहा, “इतनी ठंड में भीगी साड़ी पहने घंटों बिताने पड़े। मुझे नहीं पता कि मेरी आंटी अभी जिंदा भी हैं या नहीं।”
स्थिति अब काबू में,
घटना के बाद अखाड़ों ने मौनी अमावस्या के लिए अपना पारंपरिक ‘अमृत स्नान’ रद्द कर दिया था, लेकिन हालात काबू में आने के बाद इसे फिर से शुरू किया गया। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आश्वासन दिया है ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।





