लखनऊ, 06 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी द्वारा चौरी-चौरा महोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में “सिंधी भाषा जो वाधारो कींअं कजें-सुझाव ऐं असांजूं कोशिशू“ विषय पर संगोष्ठी में फिरोजाबाद से जुड़ी डॉ तुलसी देवी ने कहा कि सिंधी भाषा सीखने की शुरुआत घर से होनी चाहिए और घर में महिलाएं ही बच्चों को सिंधी भाषा बोलना एवं लिखना सिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे के लिए पहली शिक्षिका मां होती है और वह चाहे तो सिंधी के घर से ही विकास आरम्भ कर सकती है। सिंधी भाषा लिखने और बोलने के लिए महिलाओं को स्वयं भी इसे सीखना जरूरी है। वाराणसी से जुड़े लीलाराम सचदेवा ने कहा कि आज वर्चुअल संगोष्ठी के माध्यम से सभी प्रमुख लोगों के जुड़ने का क्रम आगे भी जारी रहना चाहिए और इस माध्यम से नवीन वातावरण में कई कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए। सिंधी भाषा के उत्थान के लिए प्रतियोगी कार्यक्रमों का भी होना जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उप्र सिंधी अकादमी के उपाध्यक्ष नानक चंद लखमानी ने उपस्थित वक्ताओं के सुझावों का स्वागत करते हुए अकादमी के कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के सम्बंध में अवगत कराया। नानक चंद ने कहा कि वर्तमान समय में कोविड-19 संक्रमण होने के कारण अकादमी द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत ऑनलाइन संगोष्ठी, लोकगीत, सिंधी भगत, सिंधी छात्र प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। इसी कड़ी में आज उक्त संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि वर्चुअल संगोष्ठी में छह वक्ताओं लीलाराम सचदेवा वाराणसी, रमेश लालवानी वाराणसी, डॉक्टर तुलसी देवी फिरोजाबाद, जानकी जेठवानी आगरा, पुष्पा मध्यान कानपुर, अनीशा तेजवानी सीतापुर के सुझावों को नोट कर लिया गया है। कार्यक्रम का संचालन स्वाति पंजवानी और धन्यवाद ज्ञापन अकादमी के निदेशक कल्लू प्रसाद द्विवेदी ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/शरद/विद्या कान्त





