हिन्दी, उर्दू के प्रयोग से भाषा लचीली : एकेडमी अध्यक्ष प्रयागराज, 25 मार्च (हि.स.)। अंग्रेजी का मुकाबला हिन्दी, उर्दू और बोलियों की मिली जुली भाषा ही कर सकती है। इस समय दिल्ली साहित्य के लिये छाया हुआ है। पहले प्रयाग और काशी के साहित्यकारों को मिलाकर एक बड़ा प्लेटफार्म तैयार किया गया था। आज हमारे सामने बड़ी चुनौतियां हैं। यह बातें मुख्य अतिथि प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को हिन्दुस्तानी एकेडमी उ.प्र, प्रयागराज के तत्वावधान में आयोजित होली के शुभ अवसर पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका नहीं बन सकते लेकिन अमेरिका बनने की कोशिश में लगे हुए हैं। हिन्दुस्तानी एकेडेमी थोड़ा बेहतर करे। हिन्दी, उर्दू को लेकर चले तो हम एक बेहतर दुनिया बना पायेंगे। हिन्दुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि हिन्दुस्तानी एकेडमी गंगा जमुनी की तहजीब है। एकेडमी हिन्दी के साथ उर्दू के विकास के लिये भी सोचती है। हिन्दी, उर्दू से देश की एकता दिखती है तथा दोनों के प्रयोग से भाषा लचीली हो जाती है। इसी क्रम में होली के पूर्व कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया है। कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में कलाम पेश करने वाले शायर एम.एन हसीन, खान अब्दुल्ला, अहमद इलाहाबादी, अकील सुल्तानपुरी, शाहिद इलाहाबादी एवं काव्य पाठ करने वाले कवि डॉ.विनम्रसेन सिंह, शरद चन्द्र श्रीवास्तव, डॉ.वीरेन्द्र तिवारी, विवेक सत्यांशु, जय प्रकाश शर्मा ‘जनकवि प्रकाश’, कुशवाहा गाजीपुरी, शिशिर सोमवंशी, डॉ.प्रीता बाजपेयी, रजिया सुल्ताना, डॉ.नीलिमा मिश्रा रहे। कवि सम्मेलन का संचालन एम.एस खान ने तथा अध्यक्षता डॉ.उदय प्रताप सिंह ने किया। इस दौरान समाज की विसंगतियों पर प्रहार करते हुए कविताएं एवं शायरी सुनायी गयी। अंत में एकेडेमी के कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर रविनंदन सिंह, डॉ. अनिल कुमार सिंह, राजेश्वर सिंह, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, प्रीति सिंह आदि उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त





