झांसी, 11 मार्च (हि.स.)। टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो ट्यूबरक्यु लोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों पर होता है। फेफड़ों के अलावा टीबी कई प्रकार की होती है जैसे कि ब्रेन, आंख, आंत, जननांग, गांठ, रीड की हड्डी आदि। इनमें से ही एक होती है दिमाग की टीबी, ऐसे तो दिमाग की टीबी एक दूसरे से नहीं फैलती। लेकिन जब फेफड़ो की टीबी से संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके मुंह से निकली बूंदें दूसरे व्यक्ति के अंदर प्रवेश कर जाती है यह बूंदे यदि दिमाग में प्रवेश कर जाती है तो व्यक्ति दिमाग की टीबी या ब्रेन टीबी होने की संभावना होती है। टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डा. मधुर्मय शास्त्री जानकारी देते हुए बताया कि ब्रेन टीबी एक खतरनाक बीमारी है, यह हमारे दिमाग को प्रभावित करती है। धीरे-धीरे टीबी के जीवाणु दिमाग में प्रवेश करते है और गांठ बना लेते है वही गाँठ बाद में टीबी का रूप ले लेती है। जिससे दिमाग की झिल्लीओं में सूजन या गांठ पड़ जाती है। जिसे मेनिनजाइटिस ट्यूबरक्लोसिस, मेनिनजाइटिस या ब्रेन टीबी भी कहा जाता है। डॉक्टर बताते है जैसे ही इसके बारे में पता लगता है व्यक्ति को इसे तुरंत दिखा लेना चाहिए क्योंकि इसमें लापरवाही से जान का खतरा हो सकता है। ये होते हैं लक्षण ब्रेन टीबी के लक्षण शरीर में धीरे-धीरे उबरते हैं। शुरुआत में बेहोशी, चक्कर आना, सिर दर्द बना रहना इसके साथ थकान, कम तीव्रता का बुखार, उल्टी, चिड़चिड़ापन, और आलस जैसी समस्याएं सामने आती हैं। दिन-ब-दिन ये लक्षण और भी ज्यदा खतरनाक होते जाते हैं। जांच कराकर ही उपचार संभव जैसे ही मरीज को ब्रेन टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि ब्रेन टीबी में लापरवाही मरीज के लिए घातक हो सकती है। इसका पता एक्सरे, एमआरआई, सिटी स्कैन, सीबी नेट और सीएसएफ जांच से लगाया जा सकता है। इसके उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज झांसी में दिखाया जा सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/महेश





