नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद के बलिया को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक और सामाजिक विवाद को जन्म दे दिया है। मंत्री ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए आयोजित एक वर्कशॉप में कहा था, “ये बलिया है, यहां के लोग अंग्रेजों के दलाल थे और दलाली का सिस्टम अभी भी चल रहा है। इसलिए बलिया भी बर्बाद है।” उनके इस बयान के बाद स्थानीय संगठनों में आक्रोश फैल गया और मंत्री के खिलाफ SIR दर्ज कराने की मांग उठने लगी।
करणी सेना ने दी कड़ी चेतावनी और इनाम का ऐलान
मंत्री के बयान के विरोध में करणी सेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी। करणी सेना के जिला अध्यक्ष कमलेश सिंह ने कहा, “जो लोग बलिया को बदनाम करने की कोशिश करेंगे, उन्हें मैं या बलिया के युवा मिलकर सबक सिखाएंगे। जो ऐसा करेगा, उसे 5 लाख रुपये का इनाम मिलेगा और उसका मुकदमा भी मैं फ्री में लड़ूंगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि बलिया का अपमान और अनादर वह कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। स्थानीय संगठनों ने भी रविवार को विरोध प्रदर्शन और पुतला जलाने का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने नियंत्रण में लिया।
सपा नेता ने कहा-मंत्री को ज्ञान प्राप्त करना चाहिए
बलिया भारत के उन पहले इलाकों में से एक था जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह कर आजादी का बिगुल फूंका था। एक मंत्री द्वारा ऐसा बयान देना निंदनीय है। उन्हें इतिहास का ज्ञान होना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा, “मंत्री संजय निषाद को बलिया के इतिहास का ज्ञान होना चाहिए। बलिया भारत के उन शुरुआती इलाकों में से एक था, जिसने ब्रिटिश शासन से आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एक मंत्री की ओर से ऐसी अभद्र भाषा निंदनीय है।
स्थानीय लोग भी नाराज
बलिया के कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने कहा कि मंत्री का बयान पूरे जिले को गलत ढंग से पेश करता है। लोगों का कहना है कि यह स्थान “वीरों और बलिदानियों की भूमि” के रूप में जाना जाता है, न कि किसी दलाली के लिए।
विवाद और बढ़ने के आसार
मंत्री संजय निषाद के बयान को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। करणी सेना की चेतावनी और सपा की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन मामले पर नजर बनाए हुए है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।





