नई दिल्ली/रफ्तार डेेेस्क। राजधानी लखनऊ का आशियाना इलाका उस वक्त दहल गया, जब एक घर के बंद कमरे से उठी गंध ने एक खौफनाक राज से पर्दा उठाया। 21 साल के एक बेटे ने अपने ही पिता की न केवल हत्या की, बल्कि उनके शव के साथ जो किया, उसे सुनकर पुलिस के भी होश उड़ गए।
कत्ल की वो काली रात: 20 फरवरी 2026
शुरुआत 20 फरवरी 2026 की सुबह लगभग 04:30 बजे हुई। कारोबारी मानवेंद्र प्रताप सिंह और उनके बेटे अक्षत प्रताप सिंह के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई। विवाद इतना बढ़ा कि अक्षत ने आपा खो दिया और पिता की ही लाइसेंसी बंदूक से उन्हें गोली मार दी। मानवेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
दृश्यम’ स्टाइल में शव को ठिकाने लगाने की साजिश
हत्या के बाद अक्षत ने जो किया, वह उसकी ठंडे दिमाग से की गई प्लानिंग को दर्शाता है:
गिरफ्तारी से बचने के लिए अक्षत ने पिता के शव के कई टुकड़े किए। उसने हाथ और पैर जैसे अंगों को काटकर सदरौना के पास अलग-अलग सुनसान जगहों पर फेंक दिया ताकि पहचान मिटाई जा सके। शरीर का मुख्य हिस्सा (धड़) उसने घर के ही ग्राउंड फ्लोर पर एक खाली कमरे में रखे प्लास्टिक के ड्रम में छिपा दिया।
बदबू ने खोला राज
मानवेंद्र सिंह 20 फरवरी से लापता थे। जब घर से असहनीय दुर्गंध आने लगी, तो पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जब घर की तलाशी ली, तो उन्हें ड्रम के अंदर शव का हिस्सा मिला। शुरुआती आनाकानी के बाद, कड़ाई से पूछताछ करने पर अक्षत ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
हत्या की वजह: ‘करियर का दबाव’
पूछताछ में जो कारण सामने आया, वह आज की पीढ़ी और माता-पिता के बीच के तनाव को उजागर करता है। पिता मानवेंद्र अपने बेटे पर प्रतियोगी परीक्षाएँ की तैयारी करने और करियर बनाने का अत्यधिक दबाव बना रहे थे। इसी दबाव और रोज-रोज की टोका-टाकी से तंग आकर अक्षत ने अपने ही पिता को खत्म करने का फैसला कर लिया।
पुलिस की कार्रवाई और फॉरेंसिक सबूत
घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और खून के नमूने संकलित किए गए हैं। अक्षत के खिलाफ हत्या (Murder) और साक्ष्य मिटाने की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपी बेटा पुलिस कस्टडी में है और पुलिस शव के बाकी हिस्सों को बरामद करने की कोशिश कर रही है।
यह घटना सिर्फ एक क्राइम रिपोर्ट नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सबक है।





