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Wednesday, March 4, 2026
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SIR में बड़ा खेल! कुशीनगर में बीजेपी विधायक के भाई ग्राम प्रधान समेत 100 से ज्यादा लोगों के वोट कटे

कुशीनगर में SIR प्रक्रिया के दौरान बीजेपी विधायक मोहन वर्मा के भाई व ग्राम प्रधान समेत 100 से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से कट गए जिससे हड़कंप मच गया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कुशीनगर में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जहां मतदाता सूची में सुधार और नाम जोड़ने की कवायद होनी चाहिए थी, वहीं यहां उलटा खेल सामने आ रहा है। ताजा मामला हाटा तहसील क्षेत्र के सुकरौली विकासखंड स्थित रामपुर सोहरौना गांव का है, जहां बीजेपी विधायक के भाई और ग्राम प्रधान के पूरे परिवार का नाम ही वोटर लिस्ट से गायब हो गया।

SIR प्रक्रिया के तहत चौंकाने वाला खुलासा हुआ

दरअसल, रामपुर सोहरौना गांव हाटा विधानसभा से बीजेपी विधायक मोहन वर्मा का पैतृक गांव है। यहां उनके सगे भाई राजेंद्र वर्मा ग्राम प्रधान हैं। जब SIR प्रक्रिया के तहत पहली मतदाता सूची प्रकाशित हुई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा, उनकी पत्नी और बेटे, तीनों के नाम मतदाता सूची में नहीं मिले। यही नहीं, गांव के 100 से अधिक लोगों के नाम भी नई वोटर लिस्ट से कट चुके हैं। जैसे ही यह बात सामने आई, गांव में हड़कंप मच गया।

बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे

नाम कटने की जानकारी मिलते ही बीएलओ और ग्राम सचिव ने आनन-फानन में बैठक बुलाई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घंटों तक माथापच्ची चली, लेकिन यह साफ नहीं हो सका कि इतने बड़े पैमाने पर नाम आखिर कैसे और क्यों काटे गए। बीएलओ भी इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी, बच्चे और सैकड़ों ग्रामीणों का मताधिकार प्रभावित हुआ है। उन्होंने मांग की कि सभी नाम तत्काल जोड़े जाएं।

इस विषय में जिलाधिकारी और BDO से बात हो चुकी है

मामला तब और गंभीर हो गया जब विधायक मोहन वर्मा की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि इस विषय में जिलाधिकारी और बीडीओ से बात हो चुकी है और जल्द ही सुधार किया जाएगा। विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि अगर जांच में यह सामने आता है कि किसी साजिश के तहत नाम काटे गए हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

अब इस पूरे मामले ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह तकनीकी गड़बड़ी है या फिर किसी राजनीतिक साजिश का हिस्साइस पर बहस तेज हो गई है। सवाल यह भी है कि जब एक ग्राम प्रधान और विधायक के भाई का नाम मतदाता सूची से गायब हो सकता है, तो आम मतदाताओं की स्थिति कितनी सुरक्षित है। फिलहाल प्रशासन सुधार की बात कर रहा है, लेकिन इस घटना ने पूरे जिले में मतदाता सूची को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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