कुशीनगर, 09 अप्रैल (हि.स.)। भूख, कुपोषण, बदहाली और उपेक्षा का देश झेल रहे मुसहर समाज के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान से कम नहीं हैं। मुसहरों के प्रति संवेदनशीलता, आत्मीय लगाव, दूरदर्शी नीति और योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन ने मुसहर समाज में योगी आदित्यनाथ की यह छवि बनाई है। योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता और मुसहरों के जीवन में बदलाव लाने के प्रण से वह विकास की धारा से जुड़कर आगे बढ़ रहा है। कुशीनगर के मुसहर परिवारों के बदलते जीवन परिवेश और विकास की धारा से हुए जुड़ने से होने बदलावों पर प्रस्तुत है एक रिपोर्ट- चार साल पहले खराब थी स्थिति चार साल पहले मुसहर परिवारों के जीवन में अंधकार और भूखमरी के अलावा कुछ भी नहीं था। समाज से उपेक्षित मुसहर परिवारों को सरकारी योजनाओं के लिए भी तरसना पड़ता था, लेकिन अब आलम जुदा है। अब उन्हें न सिर्फ सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, बल्कि वह अब फर्श से अर्श का सफर कर रहे हैं। कुशीनगर में हैं 10 हजार 414 मुसहर परिवार कुशीनगर जिले में 138 ग्राम सभाओं की 159 बस्तियों में मुसहर समाज के 10,414 परिवार हैं। चार साल पहले तक राशन के अभाव में भूख, कुपोषण, बीमारी और मौत ही इन्हें सुर्खियों में लाते थे। मीडिया की निगाह भी इन पर तभी जाती थी जब भूख से तड़प कर किसी मुसहर की मौत होती। अथवा किसी अज्ञात या जेई-एईएस की चपेट में आते थे। लेकिन अब इनकी चर्चा तब हो रही है, जब योगी आदित्यनाथ के व्यक्तिगत प्रयासों से इनकी जीवन मे बदलाव की नई इबारत लिखी जा रही है। बेबसी में जीवन से संघर्ष करने वाला मुसहर समाज अब किसी के भरोसे नहीं है, बल्कि योगी आदित्यनाथ के रूप में उन्हें एक भगवान मिल गया है। बदलाव से रोशन हुई मुसहरों की जिंदगी में विकास और विश्वास का उजियारा दिखने लगा है। यह मिला है लाभ 9,336 मुसहर परिवारों को अंत्योदय और 1078 को पात्र गृहस्थी राशन कार्ड मिल चुका है। सरकार की सख्ती से मुसहरों को चावल, गेहूं के साथ ही चना मिल रहा है। मुसहर बाहुल्य कुशीनगर के 10 ब्लॉकों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 7894 और छूटे हुए मुसहर परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 2572 परिवारों के घर बन चुके हैं। 10,159 परिवारों को शौचालय की सुविधा मिली है। इनके जीविकोपार्जन को ध्यान में रखते हुए मनरेगा के तहत 10,320 मुसहरों के जॉब कार्ड बने हैं। पेंशन योजनाओं में पात्रों का चयन कर लाभान्वित करने का कार्य भी तेजी से हुआ है। 1297 को वृद्धावस्था पेंशन और 180 को विकलांग पेंशन का लाभ मिल रहा है। शेष लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है। बच्चे भी जा रहे स्कूमुसहरों के लिए मकान और बच्चों की शिक्षा की बात सोचनी ही बेमानी थी, दो वक्त की रोटी के इंतजाम के ही लाले थे। लेकिन अब, ‘दलितों में भी दलित’ समझा जाने वाला मुसहर समाज तेजी से समाज और विकास की मुख्य धारा से जुड़ रहा है। इनकी गणना अब सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों में हो रही है। आवास, जमीन, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, पेयजल, राशन कार्ड, पेंशन योजनाओं का लाभ, मनरेगा के तहत रोजगार सब कुछ उनके लिए सुलभ हो चुका है। मुसहरों के बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। भविष्य संवारने लगे हैं। ‘मूस’ से ‘माउस’ तक लाने की है मंशा योगी सरकार की मंशा ‘मूस’ (चूहा) पकड़ने वाले मुसहरों की वर्तमान और अगली पीढ़ी को कंप्यूटर का ‘माउस’ पकड़ाने की है। शायद यही वजह है कि मुसहर परिवारोंक नौनिहालों की स्कूल भेजने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम भी दिख रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। ध्यातव्य हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जब भी वनवासियों-आदिवासियों के बीच होते हैं, तो आत्मीयता से उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित करते रहते हैं। ———————————————- कुशीनगर के मुसहरों की आबादी ———————————————– ब्लॉक मुसहर बाहुल्य गांव ———————————————— कसया 05 खड्डा। 30 नेबुआ नौरंगिया 04 फाजिलनगर 10 तमकुहीराज 06 सेवरही 15 रामकोला 01 दुदही 36 विशुनपुर 14 पडरौना 17 आंकड़ों की नजर में मिला लाभ – मुसहर परिवारों की कुल संख्या 10,414 – सर्वाधिक मुसहर परिवार, दुदही 2,770 – अंत्योदय कार्ड 9,336 – पात्र गृहस्थी कार्ड 1,078 – जॉब कार्ड 10,320 – शौचालय 10,159 हिन्दुस्थान समाचार/आमोद




