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Sunday, March 15, 2026
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कौशाम्बी: एनएचएम में 1 करोड़ 60 लाख की वित्तीय अनियमियता

— कांकरेंट एडिटर की रिपोर्ट में खुली पोल — मिशन निदेशक ने जिलाधिकारी से एक सप्ताह में कार्यवाही कर मांगी रिपोर्ट कौशाम्बी, 19 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में 1 करोड़ 60 लाख का घोटाला सामने आया है। काकरेन्ट आडिटर की रिपोर्ट में प्रकरण का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के आधार पर एनएचएम मिशन निदेशक ने आडिट समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी कौशाम्बी से एक सप्ताह में कार्यवाही कर रिपोर्ट तलब की है। साल 2019-20 में प्रदेश सरकार ने कौशाम्बी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना में खर्च का सोशल ऑडिट करने का जिम्मा कांकरेन्ट आडिटर मैसर्स केबी सक्सेना एन्ड एसोसिएट्स, कास्ट एकाउंटेंट्स लखनऊ को सौपा। आडिटर की टीम ने जनपद स्वास्थ्य महकमे द्वारा सीएचसी पीएचसी, मैन पावर सप्लाई, आरबीएसके, मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन प्रोग्राम के तहत संचालित वाहनों पर खर्च रकम, का सोशल आडिट किया गया। रिपोर्ट में ऑडिटर ने स्पष्ट रूप से ई टेंडर, टेंडर व कोटेशन प्रक्रिया में धांधली और चाहती फर्मो को मनमाने भुगतान की बात उजागर की। एनएचएम के मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय को भेजी रिपोर्ट में आडिटर ने सीएमओ कार्यालय द्वारा प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना कर भुगतान किये जाने की बात उजागर की है। आडिट रिपोर्ट में हवाला दिया गया है कि प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण यूपी शासन/ अध्यक्ष राज्य ऑडिट कमेटी द्वारा जारी निर्देश के बावजूद 10 लाख से अधिक के टेंडर प्रक्रिया एवं वैधता का परीक्षण नहीं कराया गया। आरोप है कि सीएचसी पीएचसी द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में विभिन्न फर्मों के भुगतान की फाइल जीपीएस लाग बुक, टेंडर में प्रतिभाग करने वाली फर्म की बिड, ई-वे बिल के बिना खरीद की गई। खरीद में मार्केट रेट से अधिक दर का भुगतान किया गया है। रिपोर्ट में हवाला दिया गया है कि 18 फर्मो से 1 करोड़ 34 लाख 63 हज़ार 151 रुपये एवं अन्य 17 फार्म से 25 लाख 65 हज़ार 216 रुपये का सामान जैसे मास्क, पीपीकिट, ग्लब्स, आदि बाजार रेट से ज्यादा दाम देकर खरीद कराई गई। जन सूचना के तहत रिपोर्ट लेकर सार्वजानिक करने वाले भाजपा कार्यकर्ता नागेश्वर ने प्रदेश मुखिया आदित्यनाथ योगी से विभाग से अलग हाई पावर जांच कमेटी बनाकर कड़ी कार्यवाही की मांग की है। उनका आरोप है, स्वास्थ्य महकमे के हुए 1 करोड़ 60 लाख के घोटाले में तत्कालीन जिलाधिकारी सीडीओ एवं सीएमओ की भूमिका संदिग्ध है। सीएमओ डॉ पीएन चतुर्वेदी ने बताया, आडिटर का काम जांच कर उन्हें गड़बड़ी के बारे में जानकारी देना था, न कि रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को कार्यवाही के बारे में रिपोर्ट देना। जिलाधिकारी आडिट समिति के अध्यक्ष है, उन्हें सम्बंधित रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी। मीडिया में वह कोई बयान नहीं देना चाहते है। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/विद्या कान्त

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