नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के जाने-माने कवि और पूर्व नेता कुमार विश्वास ने लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कांग्रेस परिवारवाद में उलझी रही और देश के महापुरुषों की विरासत पर राजनीति कर रही है। कुमार विश्वास ने विशेष रूप से सरदार वल्लभ भाई पटेल और महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने कभी पटेल को अपना नहीं माना। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, ये लोग तो इतने तेज हैं कि कांग्रेस कार्यालय के बाहर एक पुरखा बिठा रखा था। सरदार पटेल बाहर बैठे थे तो बीजेपी वाले उठा लाए। कांग्रेस बोली पटेल तो हमारे थे।
‘कांग्रेस परिवारवाद में उलझी रही’
कुमार विश्वास ने कहा कि कांग्रेस अपने ही परिवार और नामों में उलझी रही। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, तुम तो अपने नानाजी, पापाजी, मम्मीजी, चाचीजी में ही लगे रहे। पटेल बाहर बैठे थे तो कोई पूछने वाला ही नहीं था। उनका इशारा कांग्रेस के भीतर फैले परिवारवाद और सत्ता केंद्रित राजनीति की ओर था, जिस पर वे पहले भी कई बार सवाल उठा चुके हैं।
महात्मा गांधी पर तंज, कांग्रेस को दिखाया आईना
कुमार विश्वास ने महात्मा गांधी के सिद्धांतों को लेकर एक चुटकी लेते हुए कहा कि बीजेपी को गांधी जी की शिक्षाओं को अपनाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि गांधी जी स्वदेशी पर जोर दे रहे थे, आयुर्वेद का प्रचार कर रहे थे, गीता पढ़ रहे थे और खादी पहनने की सलाह दे रहे थे।
गांधी के सिद्धांतों का बीजेपी इस्तेमाल?
कुमार विश्वास ने अपने व्यंग्य में साफ किया कि जो कार्य गांधी जी अपने समय में समाज और राष्ट्र के लिए करते रहे, वही आज बीजेपी कर रही है। उनका तंज था कि महात्मा गांधी के वास्तविक सिद्धांत कांग्रेस के हाथ में रहने के बजाय अब बीजेपी के काम आ सकते हैं, और इस बयान में उन्होंने राजनीतिक व्यंग्य का सूक्ष्म मिश्रण पेश किया।
‘तीन फर्जी गांधी’ कहकर किया व्यंग्य
कुमार विश्वास ने कांग्रेस पर व्यंग्य करते हुए कहा कि इस पार्टी के पास पहले से ही ‘तीन फर्जी गांधी’ मौजूद हैं। इसलिए असली गांधी को लेने में बीजेपी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान ने कांग्रेस समर्थकों में विवाद खड़ा कर दिया, जबकि बीजेपी समर्थक इसे सटीक व्यंग्य और वास्तविकता के करीब मानकर प्रशंसा कर रहे हैं।
इतिहास और राजनीति पर नया विवाद
कुमार विश्वास का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में इतिहास और महापुरुषों की विरासत को लेकर राजनीति तेज है। उनके व्यंग्यपूर्ण और सटीक शब्दों ने कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। समर्थक इसे जनता तक संदेश पहुंचाने वाला व्यंग्य बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे विवादास्पद करार दे रहा है। कुमार विश्वास ने साफ किया कि महापुरुषों की असली उपलब्धियों को राजनीति से अलग करना जरूरी है।





