-हरिद्वार कुम्भ में दो दिवसीय नेत्र शिविर का हुआ समापन -हजारों श्रद्धालुओं ने कराया नेत्र परीक्षण, मिले निःशुल्क चश्मे हरिद्वार, 16 अप्रैल (हि.स.)। धर्मनगरी हरिद्वार के कुम्भ मेले में दो दिवसीय नेत्र शिविर का आज समापन हो गया। इस शिविर में हजारों श्रद्धालुओं का नेत्र परीक्षण हुआ और उन्हें निःशुल्क चश्में वितरित किये गये। इस अवसर पर गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि मानव सेवा ही दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है। शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने कहा कि कुम्भ मेले के दौरान साधु-संत यज्ञादि धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। लेकिन, ऐसे अवसरों पर मानव सेवा के निमित्त आयोजित कार्यक्रमों से वैदिक संस्कृति और परंपरा को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि सनातन काल से हमारे ऋषि-मुनि समाज कल्याण के लिये अपना सर्वस्व न्यौक्षावर करते रहे। हमें उनकी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते रहना है। जगद्गुरु ने बताया कि श्री आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद, आभा बागरोदिया चैरिटेबल ट्रस्ट एवं महावीर सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में कुम्भ मेले के बैरागी कैंप में दो दिवसीय निःशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में कुशल चिकित्सकों द्वारा दो दिन के अंदर हजारों लोगों का नेत्र परीक्षण हुआ और उन्हें निःशुल्क चश्मा और औषधियां वितरित की गईं। शंकराचार्य देवतीर्थ ने बताया कि इससे पूर्व 2019 में तीर्थराज प्रयाग में आयोजित अर्ध कुम्भ के अवसर पर भी इस तरह के शिविर का आयोजन हुआ था। उस शिविर में भी हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हुए थे। उन्होंने बताया कि श्री आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद, आभा बागरोदिया चैरिटेबल ट्रस्ट एवं महावीर सेवा समिति के संयुक्त प्रयास से पिछले वर्ष लाकडाउन के दौरान उप्र के मथुरा जिले में गोर्वधन परिक्रमा मार्ग पर कई माह तक गरीबों और असहाय लोगों को निःशुल्क भोजन आदि वितरित किये गये थे। इस दौरान वहां गायों और बंदरों की भी सेवा की गई थी। हरिद्वार कुम्भ मेले में दो दिवसीय निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ शंकराचार्य स्वामी देवतीर्थ ने ही किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्मोही अनी अखाड़ा के अध्यक्ष श्री महंत राजेंद्र दास ने की थी। इस अवसर पर सीओ अखाड़ा प्रबोध घिल्डियाल, सेक्टर मजिस्ट्रेट सचिन योगीराज, अजय ब्राह्मण्डगुरु समेत कई संत महात्मा और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/ पीएन द्विवेदी




