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पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना से मरे कर्मचारियों को लेकर हाईकोर्ट सख्त

सरकार से मांगा स्पष्टीकरण प्रयागराज, 27 अप्रैल (हि.स)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना से मरे सरकारी कर्मचारियों को लेकर राज्य चुनाव आयोग के क्रियाकलापों की कड़ी निंदा की है। हाईकोर्ट ने आयोग व इसके 27 अधिकारियों से स्पष्टीकरण माँगा है कि बताएं कि पंचायत चुनाव के दौरान कोविड गाइड लाइन्स का पालन करने में आयोग कैसे विफल रहा। कोर्ट ने कहा कि क्यों न उन्हें इसके लिए दण्डित किया जाय। हाईकोर्ट ने कोरोना के यूपी में बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि वह दिन में दो बार हेल्थ बुलेटिन जारी करे। यह बुलेटिन प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पतालों के सम्बन्ध में जारी किया जाय जो लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, कानपुर नगर, गोरखपुर व झांसी में स्थित है। इससे लोगों को रोगियों के स्वास्थ्य की जानकारी मिल सकेगी। अस्पतालों को लार्ज स्क्रीन का प्रयोग करने को कहा गया है ताकि लोग रोगियों के बारे में जान सकें। कोर्ट ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के मार्फत कितने बेड आईसीयू व कोविड वार्ड में सरकारी अथवा प्राइवेट अस्पतालों में हैं। यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा व जस्टिस अजित कुमार की खंडपीठ ने कोरोना कोरेन्टाइन सेन्टर को लेकर स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल एन्टीजेन की निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर किसी रोगी को अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जा सकती, क्योंकि रोगी अन्य कारणों से भी संक्रमित हो सकता है। उसे एक सप्ताह के लिए नान- कोविड वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि कि सभी सरकारी व कोविड का इलाज कर रहे प्राइवेट अस्पतालों में रेमडेसिविर का इन्जेक्शन व अन्य जरुरी दवाएं तथा आक्सीजन निर्बाध रूप से मिलते रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह शर्म की बात है कि आजादी के सात दशक के बाद भी हम लोगों को आक्सीजन नहीं दे पा रहे हैं। डाक्टर व अन्य मेडिकल स्टाफ की समुचित व्यवस्था करने का भी कोर्ट ने निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि लाइफ सेविग सिस्टम के साथ एम्बुलेंस की संख्या में तत्काल इजाफा किया जाय। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि कोविड से हुई हरेक मौत की जानकारी जिला के जिला जज द्वारा नामित जुडिशियल अधिकारी को दिया जाय। शव का दाह संस्कार सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक किया जाय। हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई अब 3 मई को करेगी। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/विद्या कान्त

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