gramodaya-university-held-a-virtual-dialogue-on-the-subject-of-education-society-and-current-conditions
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शिक्षा, समाज और वर्तमान स्थितियां विषय को लेकर ग्रामोदय विश्विद्यालय ने किया वर्चुअल संवाद

- युग पुरुषों के जीवन से प्रेरणा ले चुनौतियों से लड़े विद्यार्थी - प्रो. निर्मला एस मौर्य, कुलपति जौनपुर - वर्तमान परिस्थितियों में मानवता और संवेदनशीलता के साथ जुटे रहने की आवश्यकता - प्रो. नरेश चंद्र गौतम चित्रकूट, 21 मई (हि.स.)। वर्तमान सामाजिक परिस्थितियां कोविड-19 के संक्रमण चलते प्रभावित हुई हैं। भारत सहित वैश्विक परिवेश समसामयिक समस्याओं को झेल रहा है,जिसमें शैक्षिक,आर्थिक, नैतिक, धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधिया शामिल है। मनुष्य की आशावादी प्रवत्ति और अपने आत्मबल से वह विषम परिस्थितियों में भी विजय हासिल कर लेता है। इस आशय के विचार महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कला संकाय के हिंदी विभाग द्वारा शुक्रवार को आयोजित वर्चुअल संबाद में ' प्रो. निर्मला एस मौर्य, कुलपति वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर, उत्तर प्रदेश ने अपने उद्बोधन में व्यक्त किये। यह वर्चुअल संवाद शिक्षा, समाज और वर्तमान स्थितियां विषय पर केंद्रित था। वेब संवाद के मुख्य वक्ता प्रो. निर्मला एस मौर्य ने शिक्षा एवं समाज की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में चुनौती को स्वीकार करते हुए उसके निदान के लिए डटकर मुकाबला करने से विजय हासिल होगी। वर्तमान परिस्थितियों से उत्पन्न समस्याओं चलते शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभावान विद्यार्थियों के अंदर कुंठा आ रही है। विद्यार्थियों को ऐसी स्थितियों से उबरने की आवश्यकता है। वायरस कोई नई बात नहीं है इबोला, सार्स एवं जीका आदि सात प्रकार के प्रमुख वायरस पहले से मौजूद हैं। जिसमें चार सामान्य है एवं तीन वायरस घातक है। जो फेफड़ों को प्रभावित कर रहे हैं। वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि कोविड-19 ने शिक्षा की कमर तोड़ दी है शिक्षा एवं शिक्षा के स्तर को प्रभावित किया है। पहले गुरुकुल परंपरा में कौशल युक्त शिक्षा दी जाती थी। वर्तमान नई शिक्षा व्यवस्था में भी इसे प्राथमिकता दी गई है। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के संस्थापक भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख एवं ग्रामोदय विश्वविद्यालय के शाश्वत प्रेरणा स्रोत महात्मा गांधी व कबीर आदि युग पुरुषों के ज्ञान को उदाहरण देकर समाज में शिक्षा के महत्व को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज में रहने का सलीका सिखाती है। शिक्षा व्यक्ति में व्यक्तित्व का विकास करती है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विद्यार्थियों के लिए आवश्यक ई-कांटेक्ट को भविष्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया। ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था से भविष्य में स्कूल का महत्व नगण्य होने की संभावना को लघु कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया। कोविड-19 अर्थात प्रकृति ने मनुष्य को मनुष्य से जुड़ने का एक अवसर प्रदान किया है। प्रकृति लोगों को जीवन जीने का तरीका सिखा रही है। हमारी भारतीय संस्कृति, नैतिक परंपराएं रीति रिवाज परिवार के माध्यम से वापस घरों में लौट रही हैं। जिसकी आज हमें सतत आवश्यकता है। वर्तमान आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योग की पैरवी की। लॉकडाउन के चलते ई-कॉमर्स, आईटी सेक्टर एवं वर्क फ्रॉम होम से गतिविधियां संचालित हो रही हैं। हमारी आर्थिक व्यवस्था फिर से सुंदर होगी। उन्होंने कोविड-19 में जल संरक्षण को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। पेयजल की समस्या पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि शुद्ध पेयजल एवं पेयजल के स्रोतों का संरक्षण आवश्यक है। कुलपति प्रो निर्मला एस मौर्य ने कोविड-19 के दौरान विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे जनहित कार्यों की झांकी प्रस्तुत करते हुए सभी से अपील की कि वह महामारी की विभीषिका में मानव सेवा का यह अवसर न चूकें। वेब वार्ता आयोजन की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान परिस्थिति में एक दूसरे से जुड़े रहने की आवश्यकता है। आज आवश्यकता है तो समाज का वर्ग यह समझे कि समाज में वर्ग विभेद, जात-पात की जगह नहीं है। समाज में रहते हुए मानवता और संवेदनशीलता के भाव से अपने आप को परस्पर जोड़ कर रखनेकी प्रेरणा कुलपति प्रो गौतम ने दी। कार्यक्रम संयोजक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ कुसुम सिंह ने विषय परिवर्तन करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कोविड-19 के आक्रमक प्रभाव के पहार से कोई भी अछूता नहीं है। जिसके चलते व्यक्ति में उदासीनता एवं कुंठा का भाव आ गया है। ऐसी परिस्थिति में समाज को सकारात्मक दिशा देने की दिशा में गुरु एवं प्रबुद्ध वर्ग की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। सामाजिक संबंधों का जाल ही समाज है। देश काल परिस्थितियां और वातावरण इसके प्रमुख अंग है। समाज में धर्म दर्शन, साहित्य कला, दर्शन सब निहित है। यह मानव को सक्षम बनाने के लिए चैतन्य का निर्माण करती है। वर्तमान परिस्थिति में साहित्यकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके लेखन एवं रचनाओं से समाज में चुनौतियों से लड़ने के लिए आत्म बल बढ़ता है। कोविड-19 के चलते वर्तमान शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। वेब संवाद का संचालन, वेब संवाद आयोजन सचिव डॉ ललित सिंह एवं कार्यक्रम सह संयोजक डॉ राम मूर्ति त्रिपाठी रहे। वेब संवाद के आयोजन अध्यक्ष कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो नंदलाल मिश्रा ने वेब संवाद की मुख्य वक्ता कुलपति प्रो निर्मला एस मौर्य के विशिष्ट व्यक्तित्व की जानकारी देते हुए उनके शैक्षिक एवं साहित्यिक योगदान को पटल पर साझा किया। हिन्दुस्थान समाचार/रतन

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