नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । ताजमहल में शाहजहां का सालाना उर्स शुरू हो गया, और पहले दिन ही हजारों सैलानियों ने शाहजहां–मुमताज की असली कब्र का दीदार किया। नि:शुल्क प्रवेश का आकर्षण के कारण करीब 60 हजार पर्यटक स्मारक देखने पहुंचे। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के तहत सुरक्षाकर्मी और ASI अधिकारियों ने मोर्चा संभालकर भीड़ को नियंत्रित किया। यह विशेष अवसर तीन दिनों तक जारी रहेगा, और इसी तरह लोग मुफ्त प्रवेश का लाभ उठाकर ताजमहल की भव्यता और ऐतिहासिक धरोहर का आनंद ले सकेंगे।
ताजमहल में तीन दिवसीय सालाना उर्स का आगाज
गुरुवार से ताजमहल में तीन दिवसीय सालाना उर्स का शुभारंभ हुआ। नि:शुल्क प्रवेश की भीड़ के चलते दिनभर लंबी कतारें लगी रहीं, और पर्यटक उत्साह से स्मारक का दीदार कर रहे थे। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए ताज सुरक्षा पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों ने व्यापक इंतजाम किए, लेकिन भारी संख्या में आगंतुक होने के कारण उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी।
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शाहजहां के 371वें उर्स का पहला दिन
मुगल बादशाह शाहजहां के 371वें उर्स के पहले दिन गुस्ल की रस्म अदा की गई। फलों की चादर चढ़ाने की परंपरा के तहत एएसआई और उर्स कमेटी के सदस्यों ने चादर चढ़ाई। तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन उर्स 17 जनवरी तक चलेगा, जिसमें 16 जनवरी को संदल की रस्म और कव्वाली का आयोजन होगा। अंतिम दिन की भव्य रस्म 17 जनवरी को चारदपोशी अदा की जाएगी, जिसमें 1,720 मीटर लंबी चादर चढ़ाई जाएगी और लंगर वितरण भी किया जाएगा।
ताजमहल में भीड़ में बिछड़े लोग
ताजमहल देखने आई भारी भीड़ में करीब तीन दर्जन बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ गए। सुरक्षा कर्मियों की सक्रियता के तहत ताज सुरक्षा पुलिस और सीआईएसएफ ने उन्हें खोजकर परिजनों से मिलवाया। उर्स के खिलाफ अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने प्रदर्शन किया। पदाधिकारियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय के बाहर पुतला दहन किया और नारेबाजी की। इस दौरान प्रांतीय अध्यक्ष मीना दिवाकर, रवि चाहर, साहब वर्मा, बबलू निषाद, करण सिंह, पुष्पेंद्र वर्मा और राहुल मौजूद रहे।
अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं
दोपहर दो बजे के बाद नि:शुल्क प्रवेश के चलते पर्यटकों की भीड़ ने ताजमहल में हलचल बढ़ा दी। कई लोग मुख्य गुंबद के बाहर ही जूते-चप्पल उतार बैठे, जबकि ऊपर ले जाने की अनुमति नहीं थी। कुछ पर्यटक उद्यान में चहलकदमी करते दिखे, मानो ताजमहल की खूबसूरती का आनंद खुले मैदान में भी लेना चाहते हों। सुरक्षा बलों की सतर्कता ने माहौल को नियंत्रित रखा, और जवान लगातार उन्हें सही जगह पर ले जाकर व्यवस्था बनाए रख रहे।




