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Wednesday, March 11, 2026
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दो पूर्व पीएम के लिए खास थी फतेहपुर लोस सीट, लेकिन शास्त्री के पौत्र और वीपी सिंह के पुत्र को मिली थी बड़ी हार

Fatehpur Loksabha Seat: इस लोकसभा सीट ने बाहरी नेताओं को केंद्र की सत्ता तक पहुंचाया लेकिन उनकी विरासत को आगे ले जाने से ठुकरा दिया।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। फतेहपुर लोकसभा सीट अपनी गंगा-यमुनी संस्कृति के लिए जानी जाती है। इस सीट ने जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पूर्व पीएम वीपी सिंह को केंद्र तक पहुंचाया। लेकिन उनके बच्चों को इस लोकसभा सीट से मतदाताओं ने कोई महत्व नहीं दिया। दरअसल पीएम लाल बहादुर शास्त्री के बेटे हरिकृष्ण शास्त्री और पौत्र विभाकर शास्त्री ने भी अपनी राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन पौत्र विभाकर शास्त्री को निराशा ही हाथ लगी। ठीक इसी प्रकार पूर्व पीएम वीपी सिंह के बेटे अजेय सिंह ने भी इस लोकसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन उन्हें भी मतदाताओं ने निराश ही किया।

वर्ष 1980,1984 में हरिकृष्ण शास्त्री ने जीत दर्ज की थी और सांसद बने थे

फतेहपुर लोकसभा सीट से पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के बेटे हरिकृष्ण शास्त्री ने वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट से जीत दर्ज की थी। उन्होंने लोकदल के सैयद लियाकत हुसैन को हराया था। सैयद यहां के स्थानीय प्रत्याशी थे। हरिकृष्ण शास्त्री ने जिलेवाद के नारे को बेअसर कर दिया था और इस चुनाव में जीत दर्ज की थी। वर्ष 1984 में भी हरिकृष्ण शास्त्री ने जीत दर्ज की थी और सांसद बने थे।

विभाकर शास्त्री को हार का सामना करना पड़ा

हरिकृष्ण शास्त्री अपना अच्छा कार्य कर रहे थे और दो बार सांसद भी रहे उन्हें क्षेत्र में भइया व भाभी का दर्जा मिला हुआ था। लेकिन वर्ष 1989 के चुनाव में कांग्रेस को बोफोर्स घोटाले के कारण बड़ी हानि उठानी पड़ी थी। जिसके चलते हरिकृष्ण शास्त्री को भी इस लोकसभा सीट से चुनाव में दो बार हार मिली। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे विभाकर शास्त्री ने राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश की और उन्होंने 1998, 1999, 2009 में चुनाव लड़ा। विभाकर शास्त्री ने अपने पिता के अच्छे विकास कार्यों को लेकर मतदाताओं को अवगत कराया। लेकिन इस सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

पूर्व पीएम V.P Singh के बेटे अजेय सिंह को भी इस सीट से हार का सामना करना पड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के बेटे ने भी अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने वर्ष 2009 में जनमोर्चा के टिकट पर फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। लेकिन यहां के मतदाताओं ने उन्हें कोई महत्व नहीं दिया। जिससे उन्हें 7422 वोटो पर ही संतुष्ट होना पड़ा। इससे उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

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