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Tuesday, March 3, 2026
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इटावा कथावाचक विवाद पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जताई नाराजगी, बोले- ‘अगर दोषी है तो…’

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने इटावा में कथावाचक से दुर्व्यवहार की निंदा की. उन्होंने कहा कि भगवान का नाम जपने का हक सबको है,

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । उत्तर प्रदेश के इटावा में हाल ही में कथावाचक के साथ हुई अमर्यादित घटना को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी बीच मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। 

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि वे 25 दिन की विदेश यात्रा पर थे और लौटने पर उन्हें इस घटना की जानकारी मिली, जिससे उन्हें गहरा दुख हुआ। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए उन्होंने कहा, “जब हम विदेश में थे, तब भारत में कई घटनाएं हुईं, जिनमें से एक घटना बहुत ही अप्रिय और अजीब थी। यह घटना इटावा में कथावाचक के साथ दुर्व्यवहार की है।”

बागेश्वर धाम के महंत बाबा ने कहा, “वेदव्यास, महर्षि वाल्मीकि, मीरा, सूरदास, कबीरदास जैसे संत सभी भगवान के रंग में रंगे हुए थे। उनकी न तो जाति पूछी गई और न ही उनकी पहचान जाति से की गई। उनकी वाणी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। भगवान का नाम ही उनकी असली पहचान है। जैसे कौआ अपनी कर्कश आवाज में बोलता है, लेकिन रामचरितमानस में कालभुशुंडी महाराज की महिमा का वर्णन है। इसलिए जाति पर ध्यान देने की बजाय ज्ञान की ओर ध्यान देना चाहिए।”

बागेश्वर धाम प्रशासन ने भी स्पष्ट किया, “भगवान की कथा और सनातन धर्म का संदेश किसी एक जाति तक सीमित नहीं है। भगवान की महिमा का प्रचार और कथा सुनाने का अधिकार सभी को समान रूप से प्राप्त है। इसमें न तो कोई दोषी है और न ही किसी का कोई हस्तक्षेप है।”

“क्या भारत ऐसे बनेगा हिंदू राष्ट्र ?”

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इटावा की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए देश, धर्म और सामाजिक समरसता पर अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने कहा, “अगर भारत को सच में हिंदू राष्ट्र बनाना है, तो यह काम सिर्फ नारों या टकराव से नहीं होगा। भगवान के नाम का स्मरण करने का अधिकार हर किसी को है। गुरुनानक हों, मीराबाई हों, रैदास या कबीरदास, सभी ने भगवान राम और कृष्ण की महिमा का गुणगान किया है। हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं दिखती।”

“न्याय का मार्ग कानून से ही संभव”

उन्होंने कहा, “जो घटना इटावा में हुई है, वह पूरी तरह निंदनीय है। लेकिन अगर उस व्यक्ति ने वास्तव में कोई अपराध किया है, तो हमें कानून और न्याय प्रणाली की ओर रुख करना चाहिए। हमें खुद न्यायाधीश बनने की आवश्यकता नहीं है, वरना इससे विद्रोह और जातीय टकराव को बढ़ावा मिल सकता है।” उन्होंने सियासत पर निशाना साधते हुए कहा, “आज कुछ नेता जाति की राजनीति कर समाज में ज़हर घोल रहे हैं। ऐसे लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देना चाहिए।”

हिंदू राष्ट्र के संकल्प के साथ नवंबर में धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में एक नया ऐलान किया है। उन्होंने कहा, “अगर हम सच में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, तो पहले हमें जातिवाद और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद की भावना को अपनाना होगा।” इसी विचार को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से धीरेंद्र शास्त्री ने नवंबर में पदयात्रा का आयोजन करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “हम 7 से 16 नवंबर तक दिल्ली से वृंदावन तक गांव-गांव, गली-गली पदयात्रा करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि भारत का हर हिंदू जागे और जाति, पाति, छूआछूत जैसे सामाजिक विभाजनों से ऊपर उठे।”

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