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कोरोना संक्रमण व जेलों में भीड़ से संकट के चलते सीमित काल के लिए अग्रिम जमानत देना उचित

हाईकोर्ट का फैसला......... प्रयागराज, 11 मई (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते व जेलों में भीड़भाड़ होने से आरोपी के जीवन का जेल में खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में इस संक्रमण के दौरान आरोपी को सीमित अवधि के लिए अग्रिम जमानत देना उचित है, ताकि जेल में कोरोना वायरस न फैल सके। यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने गाजियाबाद के प्रतीक जैन की अर्जी पर दिया है। याची एक धोखाधड़ी केस में आरोपी बनाया गया है। कोर्ट ने कहा कि यदि याची जैन गिरफ्तार होते हैं तो उन्हें सीमित अवधि 3 जनवरी 2022 तक अग्रिम जमानत दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जेलों में भीड़भाड़ होने से रोकने के लिए निर्देश दिया है। ऐसे में इस निर्देश की अनदेखी कर जेलों में भीड़भाड़ बढ़ाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील भी यह आश्वासन नहीं दे पा रहे हैं कि आरोपी को जेल जाने से उसे कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाव किया जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि असाधारण परिस्थिति में असाधारण उपचार की आवश्यकता होती है। जेल में जाने से जेल के अंदर सम्पर्क में आने वालों के साथ इस महामारी के फैलने से इन्कार नहीं किया जा सकता। इस असाधारण परिस्थिति में आरोपी को अग्रिम जमानत मंजूर करने का पर्याप्त आधार है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि एक्सपर्ट के अनुसार कोरोना वायरस का सितम्बर में तीसरा वेब आने की सम्भावना है। कोर्ट का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। आगे कब तक प्रभावित रहेगा, यह अनिश्चितता बनी हुई है। याची के खिलाफ गाजियाबाद में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने याची को राहत देते हुए कहा कि वह जाँच में सहयोग करेगा और किसी प्रकार से साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/विद्या कान्त

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