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यूपी सरकार के चार सालों में जनता के संविधानिक अधिकारों का हुआ हनन : कांग्रेस

— लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को नहीं है विश्वास, जनता के हितों की हो रही अनदेखी कानपुर, 21 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के चाल साल पूरे होने पर सरकार और सत्ताधारी पार्टी द्वारा बराबर उपलब्धियों को गिनाया जा रहा है। वहीं विपक्ष सरकार की नाकामियों को गिनाकर जनता के बीच अपनी पैठ बनाने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस कमेटी ने कहा कि यूपी सरकार के चार सालों में जनता के संविधानिक अधिकारों का हनन हुआ है। इसके साथ ही जनता के हितों की अनदेखी कर सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं कर रही है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के चार साल पूर्ण होने पर अल्पसंख्यक कांग्रेस उत्तर प्रदेश के चेयरमैन शाहनबाज़ आलम के आह्वान पर कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के महानगर अध्यक्ष डा. निसार अहमद सिद्दीकी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। आरोप लगाते हुए शहर अध्यक्ष डा. शैलेंद्र दीक्षित ने कहा कि योगी सरकार अपनी सरकार के चार साल का जश्न मना रही है। योगी सरकार के ये चार साल पूरी तरह विफल रहे तथा इन चार साल में उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र और संविधान पर लगातार हमले हुये हैं। प्रदेश में असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है, जिसमें किसी भी पार्टी के नेता ने योगी सरकार का विरोध नहीं किया और न ही अल्पसंख्यकों व पिछड़ों, दलितों की आवाज उठायी। उत्तर प्रदेश में सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की ओर से प्रियंका वार्डा के नेतृत्व में पिछले चार सालों से कमजोर तबकों सहित मुसलमानों के सवालों पर कांग्रेस पार्टी ही संघर्ष कर रही है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के बिलरियागंज में नागरिकता संसोधन कानून के विरोध में अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं पर दमनकारी नीतियों व बढ़ते अपराध के लिए ये कार्यकाल हमेशा जाना जायेगा। इस दौरान इमरान खान, विनोद सिंह, डा. अब्दुल मजीद, हाजी सलाउद्दीन, हर्षित बाजपेई, प्रवीन द्विवेदी, बाबू अली अंसारी आदि मौजूद रहें। मारे गये 22 नौजवान डा. सिद्दीकी ने कहा कि कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका वार्डा आजमगढ़ में जख्मी महिलाओं से मिलने गयीं। उत्तर प्रदेश में नागरिकता संसोधन कानून के विरोध में सम्भल बिजनौर, मुज़फ्फरनगर मेरठ रामपुर आदि जिलों में छिड़े आंदोलन में योगी आदित्यनाथ सरकार की पुलिस की गोली से 22 नौजवान मारे गए। अफसोस है कि मुस्लिम समुदाय के झूठे और तथाकथित समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेता अखिलेश यादव और मायावती किसी भी मृतक परिजन से मिलने नहीं गए। जबकि योगी आदित्यनाथ सरकार की आंख में आंख डालकर मृतकों के परिजनों से मिलने निडर होकर प्रियंका वार्डा ही गयीं। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/मोहित

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