नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में संभल हिंसा मामले में तैनात तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश में तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और 10-12 अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगा और FIR तत्काल दर्ज नहीं की जाएगी।
मामले में पहले ही न्यायिक जांच पूरी हो चुकी है-एसपी बिश्नोई
एसपी बिश्नोई ने कहा कि मामले में पहले ही न्यायिक जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए अदालत के आदेश को चुनौती दी जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह भी साझा किया कि न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के विरुद्ध सक्षम न्यायालय में अपील की जाएगी। इस बयान से स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन FIR को फिलहाल लागू नहीं करने का रुख अपना रहा है।
अनुज चौधरी के खिलाफ मामला क्या है?
इस आदेश के पीछे की घटना 24 नवंबर 2024 की है, जब नखासा थाना क्षेत्र के खग्गू सराय इलाके में आलम नामक 24 वर्षीय युवक पापड़ बेचने के लिए निकला था। याचिकाकर्ता यामीन, जो युवक के पिता हैं, ने दावा किया कि उनके बेटे को पुलिसकर्मियों ने गोली मार दी। इस याचिका में उन्होंने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, अनुज तोमर और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया।
सुनवाई के बादमुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नौ जनवरी को आदेश दिया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। अधिवक्ता चौधरी अख्तर हुसैन साजेब ने बताया कि घायल युवक ने पुलिस से छिपकर इलाज कराया था, जिसके कारण मामले की गंभीरता और अदालत द्वारा FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया।
अनुज चौधरी और अनुज तोमर वर्तमान में कहां तैनात हैं?
वर्तमान में अनुज चौधरी फिरोजाबाद में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि अनुज तोमर संभल जिले की चंदौसी कोतवाली के प्रभारी हैं। इस विवाद की जड़ उस समय उभरी जब 19 नवंबर 2024 को वकील हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित हिंदू याचिकाकर्ताओं ने संभल जिला अदालत में दावा किया कि शाही जामा मस्जिद पहले से मौजूद हरिहर नाथ मंदिर के ऊपर बनाई गई है।
अदालत के आदेश पर सर्वेक्षण कराया गया
अदालत के आदेश पर सर्वेक्षण कराया गया और 24 नवंबर 2024 को दूसरा सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद संभल में हिंसा भड़क गई, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और 29 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इस हिंसा के सिलसिले में 12 प्राथमिकी दर्ज की, जिनमें समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क, मस्जिद कमेटी के प्रमुख जफर अली समेत कई राजनीतिक हस्तियों के नाम शामिल हैं। कुल मिलाकर, इस मामले में लगभग 2,000 लोगों को नामजद किया गया।
अदालत के आदेश के खिलाफ अपील की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पूरे मामले ने पुलिस और न्यायालय के बीच टकराव, प्रशासनिक जिम्मेदारियों और सामाजिक तनाव के गंभीर मुद्दे उजागर कर दिए हैं। CJM का आदेश और पुलिस प्रशासन की अपील से स्पष्ट होता है कि यह मामला कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील है। एसपी बिश्नोई का कहना है कि FIR तत्काल लागू नहीं होगी, लेकिन अदालत के आदेश के खिलाफ अपील की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस घटना ने न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस के कर्तव्यों पर बहस छेड़ दी है।
इस घटना ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले में कानून और व्यवस्था, न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस के कर्तव्यों पर बहस छेड़ दी है। यह मामला न केवल हिंसा पीड़ितों के परिवारों के लिए न्याय की मांग को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन और अदालत के बीच निर्णयों के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल, अनुज चौधरी और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR का मामला न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक अपील के बीच एक संवेदनशील राजनीतिक और कानूनी स्थिति बना रहा है।




