-सरस्वती विद्यामंदिर इण्टरकालेज में गोलवलकर व छत्रपति शिवाजी की मनाई गयी जयंती हमीरपुर, 19 फरवरी (हि.स.)। सरस्वती विद्यामंदिर इण्टरकालेज हमीरपुर में शुक्रवार को माधवराव सदाशिव गोलवलकर एवं छत्रपति शिवाजी की जयंती मनाते हुये उन्हें नमन किया गया। आयोजित जयंती कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य रमेशचन्द्र ने बोलते हये कहा कि माधवराव सदाशिव गोलवलकर का जन्म 19 फरवरी 1906 को नागपुर के पास रामटेक में एक ब्राहमण परिवार में हुआ था। वह नौ बच्चों में से एक मात्र जीवित पुत्र थे। 1927 में गोलवलकर ने बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय एम०एस०सी० की डिग्री हासिल की थी। वह राष्ट्रवादी नेता और विश्वविद्यालय के संस्थापक मदनमोहन मालवीय से बहुत प्रभावित थे। बाद में उन्होने बी०एच०यू० में जन्तु शास्त्र पढ़ाया जहॉ उन्होने उपनाम गुरुजी कमाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को बी०एच०यू० के एक छात्र के माध्यम से गोलवलकर के बारे मे पता चला। गोलवलकर ने 1932 मे हेडगेवार से मुलाकात की और तभी उन्हे बी०एच०यू० मे संघ चालक नियुक्त किया गया। आध्यात्म की खोज मे वह 1936 मे वह बंगाल के सरगॉची के लिए रवाना हुए। और रामकृष्ण मठ के स्वामी अखण्डानन्द की सेवा मे दो साल बितायें। उनकी वापसी पर हेडगेवार ने उन्हे अपना जीवन संघ को समर्पित करने के लिए राजी कर लिया। 1940 मे जब आर०एस०एस० प्रमुख का निधन हुआ तो गोलवलकर ने 34 वर्ष की आयु मे सरसंघचालक का पद भार संभाला। आचार्य कमलकान्त जी ने छत्रपति शिवाजी एवं कार्यालय प्रमुख उमाशंकर ने गुरुजी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत संगीताचार्य ज्ञानेश जड़िया ने सरस्वती वन्दना से की। कार्यक्रम का संचालन आचार्य बलराम सिंह ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज/





