नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को गुस्से में नजर आईं, जब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कुलपति से मिलने पहुंचीं, लेकिन उनसे मिलने का मौका नहीं मिला। अपर्णा यादव केजीएमयू उस मामले को लेकर गई थीं जो रमीज और धर्मांतरण से जुड़ा है।
क्या बोलीं अपर्णा यादव ?
एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, “महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं केवल जानकारी लेने आई थी, लेकिन वाइस चांसलर से मुलाकात नहीं हो पाई।” अपर्णा ने यह भी बताया कि पीड़िता ने उन्हें बताया कि एचओडी की जानकारी देने के बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अर्पणा यादव ने आरोप लगाया कि पीड़िता से कहा गया कि “आप महिला आयोग क्यों गई?” और इसके लिए कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों को बचाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने विशाखा कमेटी की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए और कहा कि जिन लोगों ने बयान दिए हैं, उनके बयान बदलने के लिए दबाव डाला जा रहा है। अपर्णा ने यह पूछते हुए कहा “क्या महिला आयोग संवैधानिक संस्था नहीं है?”
अपर्णा यादव का आरोप, केजीएमयू में महिलाओं के साथ हो रही छेड़छाड़
केजीएमयू के कुलपति से मुलाकात के दौरान महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि अगर उनसे बात हो जाती और निष्कर्ष निकलता, तो शायद उन्हें प्रेस वार्ता करनी ही नहीं पड़ती। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश सरकार कानून और न्याय के अनुसार कार्रवाई करेगी और सीएम योगी आदित्यनाथ इस तरह के मामलों पर सतर्क रहते हैं। अपर्णा यादव ने आरोप लगाया कि केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय में पिछले दो सालों से बिना लाइसेंस के ब्लड बैंक चल रहा है।
अपर्णा यादव ने राज्यपाल को किया टैग, उठाए गंभीर सवाल
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का हवाला देते हुए कहा कि अगर उन्हें पूरी स्थिति का पता चलेगा, तो वह इसे गंभीरता से देखेंगी। अर्पणा यादव ने आरोप लगाया कि जब रमीज मलिक केजीएमयू से फरार हुआ, तब प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू उसके संपर्क में थे। अपर्णा ने सवाल उठाया कि केजीएमयू प्रशासन ने ऐसे गंभीर मामलों में उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की। उनका कहना है कि ऐसे कदम विश्वविद्यालय की जवाबदेही और छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हैं।





