नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना न केवल शाब्दिक हिंसा है, बल्कि यह पाप भी है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “पहन लें कोई जैसे भी ‘चोले’ पर उसकी वाणी पोल खोले।” उन्होंने यह भी कहा कि न केवल जो अपशब्द बोलते हैं, बल्कि जो उनकी तारीफ में चापलूसी करते हैं, उन पर भी पाप लगता है। सपा नेता ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा विधायक जनता के बीच जाकर उनके साथ सामना करेंगे, तो जनता सड़क पर आकर उनके सामने अपना विरोध दर्ज कराएगी।
अखिलेश यादव का CM योगी के बयान पर पलटवार
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शुक्रवार, 13 फरवरी को विधानसभा में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया दी। CM योगी ने विधानसभा में कहा था कि कोई भी बिना अनुमति ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का इस्तेमाल नहीं कर सकता और हर कार्यक्रम में धार्मिक मर्यादा और कानून का पालन आवश्यक है। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि जिन लोगों ने महाकुंभ में हुई मौतों के सही आंकड़े नहीं बताए, मुआवजे में भ्रष्टाचार किया और लोगों तक मुआवजा नहीं पहुंचा, उन्होंने अपने ऊपर लगे मुकदमे भी हटा लिए, ऐसे लोग किसी और के धर्म-पद पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते।
‘अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है’
अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने बयान में ‘कानून का शासन’ का उल्लेख किया, लेकिन उनका अहंकार ही समस्या बन गया। उन्होंने कहा “जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है, तो यही परिणाम होता है। अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है और व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री की नीतियों और धर्म संबंधी अपमानजनक टिप्पणियों को भी आलोचना का केंद्र बनाया। सपा नेता ने चेतावनी दी कि अगले चुनाव में जनता अपने अधिकार का इस्तेमाल कर उन पर अपना विरोध दर्ज कराएगी और प्रदेश में नई सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है और इसे निंदनीय ही कहा जा सकता है।
‘शंकराचार्य’ उपाधि का कोई भी इस्तेमाल नहीं कर सकता-सीएम योगी
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुए विवाद के लगभग एक महीने बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक आयोजनों में नियम और मर्यादा का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। सीएम योगी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ की उपाधि नहीं जोड़ सकता और कोई भी किसी पीठ का आचार्य होने का दावा कर माहौल को बिगाड़ नहीं सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आयोजनों में कानून और धार्मिक मर्यादा का सम्मान करना अनिवार्य है और सभी को अपने दायरे में रहना चाहिए।





