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Friday, March 27, 2026
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शक्ति व भक्ति की प्रेरणापुंज के रूप में सदियों तक पूजा जाएगा मेवाड़ की वीरांगनाओं को

उदयपुर, 13 जून (हि.स.)। मेवाड़ धरा की अनगिनत माताओं ने राष्ट्रभक्त संतानों को जन्म दिया है। शक्ति एवं भक्ति की प्रेरणापुंज मेवाड़ की वीरांगनाओं को सदियों तक पूजा जाएगा। यह बात रविवार को उदयपुर के प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ पर चल रहे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती समारोह की श्रंखला में आयोजित परिचर्चा में उभर कर आई। ऑनलाइन आयोजित इस परिचर्चा में राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद उत्तर पश्चिम क्षेत्र की महिला प्रमुख राधिका लड्ढा ने कहा कि मेवाड़ की नारियां भी प्रतिभाओं की धनी रही हैं। सोलह हजार वीरांगनाओ के साथ जौहर करने वाली रानी पद्मिनी केवल सौंदर्य की देवी ही न थी, राजनीतिक सूझबूझ और चारित्रिक गुणों की भी वो बेजोड़ मिसाल थी। सन 1303 में हुए सखण के बाद चितौड़ विधर्मियों के हाथ में चला गया। नन्हा बालक हम्मीर बड़ा हुआ तो उसने मेवाड की पुनः स्थापना का भरसक प्रयास किया। तब एक छोटे से गांवखेड़ा की रहने वाली चारणी बरबड़ी देवी ने उनका सम्बल बढ़ाया और हम्मीर की पत्नी दमयंती के प्रयासों ने हम्मीर को चितौड़ के सिंहासन पर पदासीन कराया। उन्होंने किरण देवी द्वारा नोरोजी के मेले मे अकबर द्वारा छेड़खानी के प्रसंग का भी उल्लेख किया। परिचर्चा सत्र संचालक एडवोकेट भूमिका चौबीसा ने बताया कि इतिहास विभाग मोसुविवि की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मीना गौड़, यूजीसी महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रोफेसर प्रतिभा ने कहा कि मेवाड़ की माताओं ने अपने पुत्रों को पालने में ही राष्ट्र के लिए प्राण न्योछावर करने की लोरियां सुनाई हैं। लोकोपकारी कार्यों विशेष रूप से जल-स्थापत्य में न केवल राजपरिवार से जुड़ी स्त्रियों बल्कि सामान्य, निर्धन, साधनहीन स्त्रियों ने भी योगदान किया है। इससे पूर्व, शनिवार रात ऑनलाइन एकल काव्य पाठ में केकड़ी के कवि उमेश उत्साही ने कहा कि महाराणा प्रताप चाहते तो राजमहलांे का सुख भोग सकते थे, उपभोग कर सकते थे। मन मे समर्पण की भावना रही। उन्होंने सभी जाति बिरादरी का सहयोग लेकर युद्ध लड़ा। सभी के साथ बिना भेदभाव के भोजन कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने ‘हम ही शकुंतला के लाल कहलाते हैं, जो सिंह शावकों का मुंह खोल हाथ डालते हैं..’ कविता सुनाई। ’पुष्पांजलि कार्यक्रम में प्रताप को नमन’ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयन्ती पर रविवार को प्रताप गौरव केन्द्र मे पुष्पांजलि कार्यक्रम हुआ जिसमें आगंतुको ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 57 फीट ऊंची प्रताप प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित किए। केन्द्र निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि पुष्पांजलि कार्यक्रम मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्रीवर्धन, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष डाॅ. बीएल चैधरी, महामंत्री परमेन्द्र दशोरा, कोषाध्यक्ष अशोक पुरोहित, इतिहासविद प्रो. केएस गुप्ता, इतिहासकार डाॅ. देव कोठारी, राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी, सुन्दर कटारिया, कार्तिकेय नागर आदि उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल / ईश्वर

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