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Tuesday, April 7, 2026
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स्वदेशी जागरण मंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेगा वैक्सीन को लेकर पेटेंट कानूनों का विरोध

अजमेर, 05 मई(हि.स.)। स्वदेशी जागरण मंच कोरोना वैक्सीन पर पेटेंट कानून के तहत भारत सहित अन्य गरीब देशों की फार्मा कंपनियों पर वैक्सीन निर्माण पर लगी पाबंदी का विरोध करेगा। चित्तौड़ प्रांत के प्रचार प्रमुख डॉक्टर संत कुमार ने बताया कि वैश्विक कारपोरेट द्वारा यह निर्णय किया गया है कि वह पेटेंट कानूनों के तहत भारत सहित विश्व के गरीब देशों की कंपनियों को कोरोना वैक्सीन का फार्मूला और उत्पादन को साझा नहीं करेगा। स्वदेशी जागरण मंच ने वैश्विक स्तर पर कंपनियों और उनके देशों की इस नीति का पुरजोर विरोध किया है । उन्होंने बताया कि पेटेंट कानून की आड़ में विश्व के सभी विकसित राष्ट्र विकासशील और गरीब देशों की अर्थव्यवस्था को मुट्ठी में करना चाहते हैं । वैश्विक महामारी के दौरान इस तरह के पेटेंट कानूनों को समाप्त कर विश्व के प्रत्येक व्यक्ति तक वैक्सीन फार्मूला साझा कर सभी दवा निर्माता कंपनियों को इसके निर्माण की अनुमति देकर वैक्सीन को सर्व सुलभ करवाना चाहिए परंतु वैश्विक स्तर की इन बड़े कॉरपोरेटर और कंपनियों ने इस वैक्सीन को कमाई का जरिया बना कर अपने आर्थिक हित साधने का रास्ता तैयार किया है, जिसका स्वदेशी जागरण मंच पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने बताया कि कंपनियों के इस पेटेंट कानून के कारण भारत सहित विकासशील देशों की फार्मा कंपनियां इसका उत्पादन नहीं कर पाएगी। यह कंपनियां मनमाने दामों पर कोरोना वैक्सीन भारत सहित विश्व के विकासशील एवं पिछड़े देशों को बेचेगी। इन देशों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है जिसके कारण इन देशों के प्रत्येक व्यक्ति तक कोरोना वैक्सीन की सूलभ और सस्ती उपलब्धता हो सके। परिणाम स्वरूप इन देश की सरकारों का अधिकतम बजट वैक्सीन को खरीदने में चला जाएगा और सरकारी इस महंगी वैक्सीन को अपने नागरिकों को सस्ती दर पर उपलब्ध कराने में असमर्थ होगी। परिणाम स्वरूप देश की आर्थिक स्थिति तो कमजोर होगी ही साथ ही महामारी की इस विकट परिस्थिति में वैक्सीन की उपलब्धता सुगमता से नहीं होने के कारण देश के नागरिक अपनी जान गवाने पर मजबूर होंगे। डॉ कुमार ने बताया कि वर्तमान में सात भारतीय कंपनियां स्वैच्छिक लाइसेंस के तहत रेमडेसिविर बना रही, लेकिन मांग को पूरा करने के लिए उनके उत्पादन की मात्रा पर्याप्त नहीं है और कीमत सामर्थ्य की तुलना में बहुत अधिक है । सरकार को पेटेंट अधिनियम में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का उपयोग करना चाहिए और आने वाले दिनों में और अधिक कंपनियों को अनिवार्य लाइसेंस के माध्यम से इन दवाओं के उत्पादन की अनुमति देनी चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/संतोष/संदीप

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