जयपुर, 15 जून (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने पैरा मेडिकल कौंसिल से पंजीकरण हुए बिना भी संविदा पर कार्यरत लैब टेक्नीशियन को सेवा में बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने चिकित्सा सचिव, सीएमएचओ दौसा व राजस्थान पैरा मेडिकल कौंसिल से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यह आदेश शैलेन्द्र कुमार शर्मा की याचिका पर दिए। याचिका में अधिवक्ता एसके सिंगोदिया ने बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 2013 में संविदा पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिकन्दरा, दौसा में लेब टेक्नीशियन के पद पर हुई थी। उसने 2015 में पैरा मेडिकल कौंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन किया, लेकिन उसके आवेदन पर कोई निर्णय नहीं हुआ। इस दौरान उसकी सेवा जारी रही और 2016 में आरएमआरएस के जरिए भी उसे सेवा में बनाए रखने का आदेश विभाग ने दिया। इसके बावजूद उससे प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए ही काम करवाया जाता रहा। इस दौरान एक फरवरी 2021 को कौंसिल ने सभी सीएमएचओ को निर्देश दिया कि ऐसे कार्मिकों को सेवा हटाया जाए जिनका पंजीकरण नहीं है। इस आदेश के चलते याचिकाकर्ता की उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को सेवा में बनाए रखने के आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। हिन्दुस्थान समाचार/ पारीक/ ईश्वर




