जोधपुर, 20 मार्च (हि.स.)। ईसीजी टेक्नीशियन पद भर्ती के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश दिनेश मेहता की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं की अभ्यर्थिता निरस्त नहीं करने के अंतरिम आदेश जारी किए है। साथ ही 31 मार्च से पहले अस्थायी पंजीयन प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए है। मामले में अगली सुनवाई 15 मई को होगी। इसमें याचिकाकर्ता महेंद्र व अन्य 6 की ओर से अधिवक्ता यशपाल खि़लेरी ने की पैरवी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता यशपाल खि़लेरी ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर बताया कि याचिकाकर्ताओ ने महात्मा गांधी विश्वविद्यालय मेघालय से दो साल का ईसीजी तकनीशियन कोर्स पूर्ण किया। तत्पश्चात उन्होंने राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल में पंजीयन हेतु अपने आवेदन पेश किए लेकिन काउंसिल ने यह कहते हुए रजिस्ट्रेशन से इंकार कर दिया कि महात्मा गांधी विश्वविद्यालय मेघालय ने ऐसा कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे जाहिर हो सके कि उसे मेघालय सरकार ने उक्त कोर्स चलाने की अनुमति दी हो। याचिकाकर्ताओ की ओर से बताया गया कि विश्वविद्यालय का गठन अधिनियम 2010 के तहत हुआ। तत्पश्चात उसे उसे शिक्षा विभाग ने स्वीकृति जारी की और यूजीसी ने भी मान्यता दे रखी है, ऐसे में याचिकाकर्ताओं ने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से योग्यता अर्जित की है। काउन्सिल द्वारा भेजे गए पत्र का भी विश्वविद्यालय ने विस्तृत जवाब दिया है। राजस्थान पैरामेडिकल काउन्सिल का गठन 2014 में हुआ है और काउंसिल के रेगुलेशन 2014 अनुसार भी याचीगण पंजीयन होने योग्य है। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता जामवंत गुर्जर ने भी याचीगण की ईसीजी डिप्लोमा योग्यता को मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से प्राप्त होना जाहिर किया। कर्मचारी चयन बोर्ड जयपुर द्वारा चल रही ईसीजी टेक्नीशियन पद भर्ती हेतू काउंसिल का पंजीयन प्रमाण पत्र आवश्यक किया है। ऐसे में याचीगण को पंजीयन प्रमाण पत्र के अभाव में भर्ती से बाहर कर दिया जाएगा जो अवैध और मनमाना है। याचिकाकर्ताओ के अधिवक्ता खिलेरी ने बताया कि विश्वविद्यालय के अधिनियम अनुसार पैरामेडिकल कोर्स करने हेतु विश्वविद्यालय अधिकृत है औऱ अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु मेघालय में कोई पैरामेडिकल काउन्सिल भी नही है, ऐसे में एनओसी के अभाव में पंजीयन नही करना मनमाना औऱ गैर कानूनी है। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश/संदीप




