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उदासीनता : धौलपुर-करौली-गंगापुर रेल परियोजना के पहिए थमे

धौलपुर, 21 मार्च (हि.स.)। पूर्वी राजस्थान की बहु प्रतीक्षित रेल परियोजनाओं में शुमार धौलपुर-करौली-गंगापुर रेल परियोजना का काम बीते कई सालों अधर में लटका है। सरकार की उदासीनता के चलते ऐसा लगता है कि डांग इलाके के धौलपुर और करौली जिलों को सुविधाजनक रेल संपर्क मुहैया कराने वाली इस परियोजना के पहिए थम गए हैं। और तो और करीब डेढ सौ साल पुरानी धौलपुर की रियासतकालीन नैरोगेज ट्रेन के प्रति रेल प्रशासन की उदासीनता के चलते बीते एक साल से नैरोगेज ट्रेन का संचालन बंद है। हालात से परेशान लोग अब अपनी तकदीर को कोस रहे हैं। फिलहाल, करौली-धौलपुर सांसद डा. मनोज राजोरिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धौलपुर-सरमथुरा-करौली-गंगापुर सिटी रेल परियोजना के लिए बजट आवंटित कराने का आग्रह किया है। करीब दस साल पूर्व धौलपुर जिले के सरमथुरा कसबे में धौलपुर-करौली-गंगापुर रेल परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन रेलराज्यमंत्री जय सूर्य प्रकाश रेडडी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया था। धौलपुर और करौली जिलों के डांग इलाके को विकास के मानचित्र पर लाने वाली धौलपुर-करौली-गंगापुर रेल परियोजना दो चरणों में पूरी होनी है। पहले चरण में धौलपुर से सरमथुरा के बीच में नैरागेज से ब्राडगेज में आमान परिवर्तन होगा। वहीं दूसरे चरण में सरमथुरा से करौली होते हुए गंगापुर तक रेल विस्तार की योजना है। इससे धौलपुर जिले का रेल संपर्क करौली और गंगापुर होते हुए पश्चिम रेलवे के जयपुर-कोटा रूट से हो जाएगा। वहीं,जयपुर से दक्षिण भारत की ओर जाने के लिए उत्तर मध्य रेलवे के धौलपुर जंक्शन के जरिए एक नया रेल कारीडोर बन सकेगा। कई दशकों पुरानी धौलपुर-गंगापुर रेल परियोजना को वर्ष 2010-11 के बजट में मंजूरी मिली थी। इसके दो साल बाद वर्ष 2012-13 में परियोजना से संबधित सर्वें का काम पूरा किया गया। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि 144.6 किलोमीटर लंबाई वाली इस रेल परियोजना की प्रस्तावित लागत 2030.50 करोड रूपए है। इस रेल लाईन पर करीब बीस रेलवे स्टेशन बनेंगे। इनमें धौलपुर के अलावा नुरपुरा,गढी सांदरा,सुरोठी,मोहारी,रनपुरा,आंगई,कांकरेट,बरौली,सरमथुरा,बडागांव,टिटवाई,करौली,कैलादेवी रोड,नया आटा,कुरगांव तथा गंगापुर सिटी शामिल हैं। उधर, सरकार की उदासीनता का आलम यह है कि रेल प्रशासन ने बीते एक साल से वर्तमान में नैरोगेज ट्रेनों का संचालन बंद कर रखा है। देश में कोरोना संकट के शुरू में एक साल पूर्व आज ही के दिन 22 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन के कारण ब्राडगेज के साथ साथ धौलपुर में नैरोगेज ट्रेनों के पहिए भी थम गए थे। इसके साथ ही उच्च रेल प्रशासन ने नैरोगेज सैक्शन में सभी आधा दर्जन ट्रेनों 52179 धौलपुर-सरमथुरा,52180 सरमथुरा-धौलपुर,52181 धौलपुर-तांतपुर,52182 तांतपुर-बाडी, 52183 बाडी-सरमथुरा तथा 52184 सरमथुरा-धौलपुर जैसी पेंसेजर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया था। धौलपुर जिले के बाडी,बसेडी और सरमथुरा क्षेत्र में फैले डांग इलाके में आज भी नैरोगेज का ही आसरा है। लेकिन देश में रेल सेवाओं की बहाली की हालिया कवायद में अभी तक धौलपुर की नैरोगेज ट्रेनों के संचालन के बारे में भी कोई निर्णय अथवा दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। हाल ही में करौली-धौलपुर सांसद डा. मनोज राजोरिया ने धौलपुर-सरमथुरा-करौली-गंगापुर सिटी रेल परियोजना हेतु आवश्यकतानुसार बजट आवंटित कराने हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से निवेदन किया है। डा. राजोरिया ने बताया कि पूर्व में यह योजना फ्रीज अवस्था में थी। इसके बाद में रेलवे बोर्ड द्वारा इसका रिवाईज्ट एस्टीमेट उत्तर मध्य रेलवे द्वारा तैयार करवाया गया। उक्त संशोधित तकमीना रेलवे बोर्ड में परीक्षणाधीन है। गत बजट सत्र में इस परियोजना हेतु 50 करोड रूपये की राशि आवंटित की गयी थी। इसके उपरांत उत्तर मध्य रेलवे द्वारा धौलपुर से सरमथुरा तक आमान परिवर्तन से संबंधित कार्यो निविदायें आवंटित करते हुए नवंबर 2020 में खोली जा चुकी हैं। सांसद डा. राजोरिया ने बताया कि इस बजट वर्ष में उक्त रेल परियोजना को मात्र एक करोड रूपये की राशि आवंटित की गयी है। प्रधानमंत्री से उक्त राशि को बढाते हुए कम से कम 100 करोड रूपये करने की मांग की गई है,जिससे परियोजना का काम शुरू हो सके। हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप/ ईश्वर

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