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Sunday, March 22, 2026
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कभी हंसा तो कभी रोया, लेकिन गर्व से सीना हुआ चौड़ा, जिंदगी की सच्ची घटनाओं को एक धागे में पिरोया बावा ने

बावा ने रिलीज की सर्घंष के 45 साल पर किताब लुधियाना 1 जून (हि.स.) । कुछ लोग अपनी जिंदगी में संघर्ष करके एक ऐसी मिसाल बन जाते हैं ,जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्तोत्र हो जाते हैं। एक ही इंसान अपने साथ अनेकों रंग लेकर चलता है और अपनी जिंदगी में कई तरह के अहम रोल निभाता है। ऐसे ही एक इंसान हैं के के बावा , जिन्होंने अपनी जिंदगी में संघर्ष करते हुए ऊंचाइयों को छुआ। जहां तक के आतंकवाद के दौर में उन्होंने गोलियां तक भी खाई। पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव तथा के पंजाब राज्य उद्योग विकास निगम चेयरमैन कृष्ण कुमार बावा एक राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ सामाजिक , धार्मिक तथा साहित्यिक गतिविधियों के साथ जुड़े हुए हैं । अपनी जिंदगी के यादों को उन्होंने एक किताब में पिरोया है । संघर्ष के 45 साल किताब में उन्होंने अपनी जिंदगी के अलग अलग रंगों को उजागर किया है और इसमें अपनी जिंदगी के खुशी और गम के पल को शामिल किया है। बावा ने इस पुस्तक में अपनी विभिन्न संस्थाओं बैरागी महामंडल, मालवा सभ्यचारक मंच, बाबा बंदा सिंह बहादुर अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशन, पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी, पंजाब आतंकवाद पीड़ित जत्थे बंदी पंजाब, बाबा विश्वकर्मा अंतर्राष्ट्रीय फाउंडेशन, के बारे में भी लिखा है । लुधियाना के गांव रकबा में पैदा हुए बावा ने आज समाज से बातचीत करते हुए बताया कि इस पुस्तक में उनके जन्म, बचपन , जवानी, परिवार , गांव , बिरादरी , समाज सेवा, सियासी जीवन , सभ्यचारक कार्य , मित्रता, मोहब्बतें , नुकसान लाभ की दास्तान लिखी है। उन्होंने बताया कि इसमें बहुत सारी यादों को लिखा है । उन्होंने कहा कि मैं साहित्यकार नहीं पर साहित्यकारों की संगत का मौका जरूर मिलता रहा । मैंने जो कुछ भी लिखा है वह साहित्यिक चाहे ना हो पर मेरी जिंदगी का सच है। इसमें उनकी जिंदगी की सच्चाई सादगी तथा संघर्ष की दास्तां लिखी गई है। जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव से लेकर कहां से चलकर कहां तक पहुंची यह सब कुछ पुस्तक में विवरण दिया है । जीवन के बारे में उन्होंने कहा कि ठोकरें संघर्ष तथा मेहनत वाला रहा। इस पुस्तक को लिखते समय वह कई बार भावुक हुए, कई बार अपने अंदर हंसे और कई बार उदास हुए। कई बार गर्व से मेरा सीना भी चौड़ा हुआ । कई बार मुझे अपनी गलतियों का एहसास भी हुआ, क्योंकि मेरा जीवन एक बहुत ऊंचे नीचे टेढ़ी-मेढ़ी राहों में से गुजरा है । कहने का भाव मैंने जिंदगी में कई रंग देखे हैं। सामाजिक रुतबा तथा आर्थिक पक्ष मध्यवर्गीय परिवार का एक बच्चा जब ऊंचे राजनीतिक तथा सामाजिक कार्य का सपना लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करता है, तो उसका गैर राजनीतिक बैकग्राउंड होना उसकी कमजोरी बनता है। आर्थिक तौर पर कमजोर होना उसके रास्ते मैं एक बड़ी अड़चन बन जाता है मनुष्य की इच्छा शक्ति उसको बल देती है। मैंने पुस्तक में कई ऐसी सच्ची घटनाओं का जिक्र किया जो शायद किसी को बुरी लगे पर सच बोलना भी जिंदगी का हथियार होता है। जो हर इंसान के पास होना जरूरी है। हिन्दुस्थान समाचार / कुमार / नरेंद्र जग्गा

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