Manipur Violence: MTF ने फिर खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, कहा- केंद्र सरकार मामले को लेकर गंभीर नहीं

याचिका में कहा गया है कि मीडिया में रिपोर्ट दिखाई जा रही है कि दो समुदायों के बीच की लड़ाई है। ये तस्वीर पूरी तरह से गलत है।
Manipur Violence को लेकर MTF ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा फिर खटखटाया
Manipur Violence को लेकर MTF ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा फिर खटखटाया

नई दिल्ली, हिन्दुस्थान समाचार। मणिपुर ट्राईबल फोरम (एमटीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में दूसरी याचिका दायर कर कहा है कि केंद्र सरकार ने कोर्ट में जो आश्वासन दिया था, वो झूठा था। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार मणिपुर के मामले पर गंभीर नहीं है। याचिका में मांग की गई है कि सीआरपीएफ कैंपों में भागकर गए मणिपुर के आदिवासी लोगों को वहां से निकाला जाए और उन्हें उनके घरों में सुरक्षित रूप से पहुंचाया जाए।

कुकी समुदाय के 81 से ज्यादा लोगों की हुई मौत

याचिका में कहा गया है कि मणिपुर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 17 मई को जो पिछली सुनवाई हुई थी, उसके बाद से कुकी समुदाय के 81 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है औऱ 31,410 कुकी विस्थापित हो चुके हैं। इस हिंसा में 237 चर्चों और 73 प्रशासनिक आवासों को जला किया गया है। इसके अलावा करीब 141 गांवों को नष्ट कर दिया गया है। केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री कुकी समुदाय को खत्म करने के सांप्रदायिक एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

हमलावरों को किया जाए गिरफ्तार

याचिका में कहा गया है कि मीडिया में रिपोर्ट दिखाई जा रही है कि दो समुदायों के बीच की लड़ाई है। ये तस्वीर पूरी तरह से गलत है। हमलावरों को सत्ताधारी दल भाजपा का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में जो लोग हमलावरों का समर्थन कर रहे हैं, अगर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो शांति बहाली के सारे प्रयास बेमानी साबित होंगे।

हाईकोर्ट ने मैतई समुदाय को एसटी का दर्जा देने का दिया था आदेश

17 मई को केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि हिंसा काबू में आ चुकी है। हाईकोर्ट ने मैतई समुदाय को जनजाति (एसटी) का दर्जा देने का जो आदेश दिया था, उसके लिए भी राज्य सरकार को हाई कोर्ट ने एक साल का समय दे दिया था। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आगाह किया था कि सरकार से जुड़े लोग किसी समुदाय के खिलाफ बयान न दें।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि पेट्रोलिंग हो रही है। परिवहन को लेकर भी कदम उठाए गए हैं। हजारों लोगों को मदद दी गई है। पीड़ितों को मुआवजा दिया जा रहा है। सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं। तीन करोड़ रुपये की आकस्मिक निधि को मंजूरी दी गई है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूरे मणिपुर में हुई अशांति

उल्लेखनीय है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। एक याचिका भाजपा विधायक डिंगांगलुंग गंगमेई और दूसरी याचिका मणिपुर ट्राईबल फोरम ने दायर की है। भाजपा विधायक गंगमेई की ओर से दायर याचिका में मणिपुर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूरे मणिपुर में अशांति हो गई है। इसकी वजह से कई लोगों की मौत हो गई। हाई कोर्ट ने 19 अप्रैल को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वो मैतई समुदाय को एसटी वर्ग में शामिल करने पर विचार करे। गंगमेई की याचिका में कहा गया है कि किसी जाति को एसटी में शामिल करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है न कि हाई कोर्ट के पास।

असम के पूर्व डीजीपी हरेकृष्ण डेका के नेतृत्व में गठित की जाए एसआईटी

मणिपुर ट्राईबल फोरम की ओर से दाखिल दूसरी याचिका में मांग की गई है कि सीआरपीएफ कैंपों में भागकर गए मणिपुर के आदिवासी समुदाय के लोगों को वहां से निकाला जाए और उन्हें उनके घरों में सुरक्षित रूप ये पहुंचाया जाए। याचिका में मांग की गई है कि राज्य में हुई हिंसा की जांच असम के पूर्व डीजीपी हरेकृष्ण डेका के नेतृत्व में गठित एसआईटी करे। इस एसआईटी के कामों की मानिटरिंग मेघालय राज्य मानवाधिकार आयोग के पूर्व चेयरमैन जस्टिस तिनलियानथांग वैफेई करें ताकि आदिवासियों पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।

Related Stories

No stories found.