नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मणिपुर में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद चुराचांदपुर जिले के तुइबोंग इलाके में हिंसा भड़क गई। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और नई सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने आग लगाकर हंगामा किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भीड़ को काबू में करने के प्रयास में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी है।
उपमुख्यमंत्री के विरोध में भड़की हिंसा
चुराचांदपुर में हुई झड़प का मुख्य कारण भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री बनने का विरोध था। प्रदर्शनकारी तुइबोंग बाजार के पास जमा होकर टायर जलाने लगे और किपगेन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति तब और बिगड़ गई जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों की संख्या कम होने के कारण प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिससे जवाब में सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा।
झड़प में घायल और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में दो लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। कांगपोकपी के रहने वाले नेमचा किपगेन ने बुधवार शाम को उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिसके बाद से जिले में तनाव और विरोध प्रदर्शन जारी है।
कुकी समुदाय ने किया सामाजिक बहिष्कार और बंद का आह्वान
मणिपुर सरकार में तीन कुकी-विधायकों के शामिल होने के बाद एक संगठन ने उन पर समुदाय के साथ विश्वासघात करने और मेइती समुदाय के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाते हुए उनके सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की है। इसके अलावा, कई समूहों ने कुकी बहुल चुराचांदपुर जिले में शुक्रवार को ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान भी किया। याद रहे कि मणिपुर में मई 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़की थी, जिसके कारण पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।
कुकी-जो समुदाय के नेताओं के शामिल होने के साथ नई सरकार का गठन
कुकी-जो समुदाय के नेताओं द्वारा समुदाय के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की मांग के बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यह पदभार भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के लगभग एक वर्ष बाद संभाला। इसके साथ ही, कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट की विधायक एल. दिखो को मणिपुर के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। विधानसभा में कुकी-जो समुदाय के कुल 10 विधायक हैं, जिनमें से सात भाजपा से हैं।
कुकी समुदाय के विधायक एन. सनाते और एल. एम. खौते, जो भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा हैं, ने इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर राज्य में सरकार गठन का दावा पेश किया। इस कदम पर कुकी-जो परिषद (केजेडसी) ने गुरुवार को कड़ा विरोध जताया और कहा कि यह 13 जनवरी 2026 के लुंगथू प्रस्ताव का घोर उल्लंघन है।
प्रस्ताव के अनुसार, कुकी-जो समुदाय के सदस्य केवल तब सरकार गठन में भाग लेंगे जब केंद्र और राज्य से लिखित आश्वासन प्राप्त होगा कि उन्हें एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अलग प्रशासन मिलेगा। केजेडसी ने कहा कि सरकार में शामिल होकर इन विधायकों ने अपने ही समुदाय के साथ विश्वासघात किया है और मेइती समुदाय के साथ जुड़ गए हैं। संगठन ने स्पष्ट किया, “केजेडसी मणिपुर सरकार में भाग लेने वाले सभी कुकी-जो विधायकों की निंदा करता है और कुकी-जो के सभी क्षेत्रों में उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा करता है।”
कुकी-जो समुदाय में सामाजिक बहिष्कार की घोषणा और चेतावनी
कुकी-जो परिषद (केजेडसी) ने अपने समुदाय के लोगों से स्पष्ट आग्रह किया है कि वे सरकार में शामिल होने वाले कुकी-जो विधायकों के साथ किसी भी सामाजिक, पारंपरिक या सार्वजनिक मामले में सहयोग या संबंध न बनाएं। संगठन ने कहा कि यह सामाजिक बहिष्कार तब तक लागू रहेगा जब तक ये विधायकों अपने कदमों को कुकी-जो लोगों के सामूहिक रुख के अनुरूप नहीं बनाते। इसके अलावा, कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है, ताकि भविष्य में इसी तरह का विश्वासघात दोबारा न हो।
कुकी-जो विधायकों के खिलाफ लेइमाखोंग में प्रदर्शन और चेतावनी
बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर और सड़क पर बांस रखकर उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के शपथ ग्रहण का विरोध किया। इस दौरान कुकी लिबरेशन आर्मी (लेटखोलुन) ने एक बयान जारी कर यह कहा कि यह “स्पष्ट और अंतिम चेतावनी” है। संगठन ने चेतावनी दी कि कोई भी कुकी-जो प्रतिनिधि, जो मणिपुर सरकार के गठन में भाग लेने का फैसला करता है, उसे अपने समुदाय के लोगों के साथ विश्वासघात करने वाला माना जाएगा। बयान में यह भी कहा गया कि ऐसे किसी भी कदम के चलते अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उन कुकी-जो विधायकों पर होगी।
मणिपुर में यह हालात मई 2023 से जारी जातीय हिंसा का हिस्सा हैं, जिसकी शुरुआत पहाड़ी जिलों में निकाली गई आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हुई थी। यह रैली बहुसंख्यक मेइती समुदाय के अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में निकाली गई थी। हिंसा में अब तक कुकी और मेइती समुदाय के सदस्यों सहित सुरक्षा बलों के कम से कम 260 लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं।





