नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की मेयर की कुर्सी अब एक महिला के नाम तय हो गई है। आज गुरुवार को लॉटरी प्रक्रिया के जरिए मेयर पद के लिए आरक्षण तय किया गया, जिसमें यह सीट सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित घोषित हुई। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर बीएमसी की कमान किस महिला के हाथों में जाएगी।
आरक्षण सामने आने के बाद जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें बीजेपी की तेजस्वी घोसालकर सबसे आगे मानी जा रही हैं। उन्होंने वार्ड नंबर 2 से जीत दर्ज की है। दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी पहले उद्धव ठाकरे गुट से जुड़ी थीं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और चुनाव जीतने में कामयाब रहीं।
बता दें कि तेजस्वी घोसालकर, पूर्व पार्षद अभिषेक घोसालकर की पत्नी हैं। अभिषेक घोसालकर की कुछ समय पहले फेसबुक लाइव के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिससे यह मामला काफी चर्चा में रहा था। अब राजनीतिक समीकरण और पार्टी समर्थन के आधार पर यह देखना अहम होगा कि क्या तेजस्वी घोसालकर बीएमसी की अगली मेयर बनती हैं या रेस में कोई नया नाम उभरता है।
तेजस्वी घोसालकर का राजनीतिक सफर
तेजस्वी घोसालकर का राजनीतिक सफर कई अहम मोड़ों से होकर गुजरा है। हालिया चुनाव में उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट की उम्मीदवार धनश्री कोलगे को मात देकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। इससे पहले वर्ष 2017 में उन्होंने अविभाजित शिवसेना के टिकट पर बीएमसी के वार्ड नंबर 1 से चुनाव जीतकर नगर राजनीति में कदम रखा था। समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदले और 15 दिसंबर 2025 को तेजस्वी घोसालकर ने उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया।
बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने चुनावी मैदान में जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर ली। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो फरवरी 2024 में उनके पति अभिषेक घोसालकर की हत्या कर दी गई थी। अभिषेक घोसालकर एक बैंक के निदेशक थे। इस दुखद घटना के बावजूद तेजस्वी घोसालकर ने राजनीति में सक्रिय रहकर अपनी पहचान बनाई है।
BMC मेयर की कुर्सी पर बीजेपी की मजबूत दावेदारी
बीएमसी के मेयर पद को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। हालांकि शिवसेना की ओर से भी दावेदारी पेश की जा रही है, लेकिन सियासी गलियारों में यह माना जा रहा है कि मेयर की कुर्सी पर बीजेपी का कब्जा तय माना जा रहा है। नगर निगम चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। पार्टी ने शिवसेना के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था और 89 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। दोनों दलों के आंकड़े जोड़ने पर कुल 118 सीटें बनती हैं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से चार अधिक हैं। इसी वजह से गठबंधन के पास सत्ता बनाने के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद है।
दिलचस्प बात यह है कि राज्य में सत्ता में होने के बावजूद एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना से ज्यादा सीटें उद्धव ठाकरे गुट ने जीती हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने इस चुनाव में 65 वार्डों में जीत हासिल की है। हालांकि संख्या के लिहाज से बीजेपी का पलड़ा भारी होने के कारण मेयर पद पर उसकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।





