नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पुणे पोर्शे क्रैश मामले में 17 साल के नाबालिग आरोपी पर बालिग के रूप में मुकदमा चलाने की मांग पुणे पुलिस कर रही है। इसके लिए पुलिस ने उच्च न्यायालय आवेदन भी दायर किया है। अब नाबालिग आरोपी के वकील ने कहा है कि इस प्रक्रिया में लगभग 90 दिन लग सकते हैं।
नाबालिग आरोपी के वकील प्रशांत पाटिल ने रखा अपना पक्ष
नाबालिग आरोपी के वकील प्रशांत पाटिल के अनुसार, किशोर न्याय अधिनियम (JJA) में यह निर्धारित करने की प्रक्रियाएं है कि कानून-व्यवस्था के अंदर चाइल्ड इन कनफिलिक्ट (CCL) के तहत आरोपी नाबालिग को बालिग माना जाएगा या नहीं। इस प्रक्रिया को करने में लगभग 90 दिन लगते हैं। यदि किसी नाबालिक आरोपी को CCL के तहत गिरफ्तार किया जाता है तो पुलिस को बालिग मानने के लिए गिरफ्तारी के 30 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना होगा। प्रशांत पाटिल ने ANI को बताया कि आरोप पत्र दायर होने के बाद 2 महीने की प्रक्रिया चलती है। जिसमें मनोवैज्ञानिक और सामाजिक मूल्यांकन के साथ-साथ नशामुक्ति परीक्षण भी शामिल होता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रक्रिया के दौरान आरोपी को रिमांड होम में रहने की जरूरत नहीं है
इस हादसे से लोगों में गुस्सा
पुणे रोड एक्सीडेंट मामले में किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी को 5 जून तक 14 दिनों के लिए रिमांड पर भेज दिया है। देशभर में इस पुणे पोर्शे कांड को लेकर लोगों में आक्रोश और गुस्सा को देखते हुए JJB ने अपने फैसले को पलट दिया है। इस घटना में नाबालिग आरोपी ने शराब चलाकर लग्जरी गाड़ी से दो लोगों को टक्कर मारी, दोनों की मौके पर मौत हो गई।
नाबालिग आरोपी के वकील ने फैसले का किया विरोध
पुणे रोड एक्सीडेंट के नाबालिग आरोपी की ओर से पेश वकील प्रशांत पाटिल ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में JJB के समक्ष याचिका दायर की थी कि आरोपी को रिमांड होम भेजा जाए। उन्होंने आगे कहा कि JJB में तीन सदस्यों की पैनल ने चाइल्ड इन कनफिलक्टिंग (CCL) के तहत नाबालिग आरोपी को हिरासत में लेने और उसे रिमांड होम भेजने का फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि इस फैसले पर बहस छिड़ी। नाबालिग आरोपी की ओर से मैंने इस फैसले का विरोध किया क्योंक आरोपी के खिलाफ लोगों के बीच गुस्सा है ऐसे में उसकी जान को खतरा है। उन्होंने JJB को बताया कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 के तहत ये फैसला योग्य नहीं है।
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