नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पुणे महानगर पालिका (PMC) चुनाव 2026 से पहले महाराष्ट्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है। एक ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों शरद पवार और अजित पवार के बीच साथ आने की कवायद चल रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए दोनों से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस के इस फैसले से पुणे निकाय चुनाव के सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से संपर्क कर पुणे महानगर पालिका चुनाव के लिए गठबंधन का प्रस्ताव रखा था। इसी बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया कि वह न तो शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (एसपी) और न ही अजित पवार की NCP के साथ किसी तरह का गठबंधन करेगी। महाराष्ट्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष मोहन जोशी ने गुरुवार, 26 दिसंबर को पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों एनसीपी गुटों ने पुणे महानगर पालिका चुनाव एक साथ लड़ने का फैसला किया है, ऐसे में कांग्रेस के लिए उनके साथ गठबंधन का कोई औचित्य नहीं बचता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक पहचान और विचारधारा से कोई समझौता नहीं करेगी।
मोहन जोशी ने कहा कि कांग्रेस पुणे महानगर पालिका चुनाव महा विकास आघाड़ी (MVA) के सहयोगी दलों और समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ मिलकर लड़ेगी। उन्होंने बताया कि मुंबई में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), आम आदमी पार्टी (AAP), राष्ट्रीय समाज पक्ष (RSP) जैसी पार्टियों से गठबंधन की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसके अलावा, यदि वंचित बहुजन आघाड़ी इस गठबंधन में शामिल होना चाहती है, तो कांग्रेस उसके लिए भी दरवाजे खुले रखेगी।
कांग्रेस ने यह भी दोहराया कि वह धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली पार्टियों के साथ ही पुणे का चुनाव लड़ेगी। हाल ही में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने यह खुलासा किया था कि उन्हें अजित पवार की ओर से गठबंधन का प्रस्ताव मिला था, लेकिन अब पार्टी ने इस पर अंतिम फैसला सुना दिया है। कांग्रेस का यह कदम पवार खेमों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और माना जा रहा है कि इसका असर पुणे महानगर पालिका चुनाव की रणनीति और परिणामों पर भी पड़ सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह रुख पवार खेमों के लिए बड़ा झटका है और इससे पुणे महानगर पालिका चुनाव में त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के इस फैसले के बाद पवार गुट अपनी रणनीति में क्या बदलाव करते हैं और इसका असर PMC चुनाव 2026 के नतीजों पर कितना पड़ता है।




