नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पुणे में नाबालिक द्वारा दो लोंगो कार से दो लोगों की जान लेने के बाद मामले में एक नया एंगल निकल कर सामने आया है। दरअसल मामले की जांच के दौरान नाबालिग ने इस बात का दावा किया है कि हादसे के समय गाड़ी को उसका ड्राइवर चला रहा था। जबकि अब तक मामले में कहा जा रहा था कि पिता ने ड्राइवर को कहा था कि यदि वह गाड़ी चलाने के मांगे को दे दी जाए। साथ ही अबतक मामले को इस नज़र से देखा जा रहा था कि नाबालिग से एक्सीडेंट हुआ है। लेकिन नाबालिग द्वारा किए दावे में मामले में तीखा मोड़ ला दिया है। साथ ही गाड़ी में बैठे नाबालिग के दो दोस्तों ने भी नाबालिग द्वारा किए गए दावे का समर्थन किया है।
क्या है मामला?
रियल एस्टेट के दिग्गज विशाल अग्रवाल के नाबालिग बेटे द्वारा रविवार को एक कार हादसे में दो लोगों की जान चली गई थी। जिसके 15 घंटे बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को जमानत दे दी थी। लेकिन कुछ शर्तों के साथ। पर जिन शर्तों के तहत उसे जमानत मिली थी, उनसे लोगों में गुस्सा था। क्योंकि वह सज़ा दो लोगों की जान की भरपाई के सामने कुछ भी नहीं थी। साथ ही मामले में पब को भी बंद कर दिया था, जहां नाबालिग ने शराब का सेवन किया था। हालांकि पुणे कोर्ट ने नाबालिग की बेल को खारिज करते हुए उसे जुवेनाइल सेंटर भेज दिया है।
पुणे आरटीओ ने जारी किया नोटिस
बताते चलें कि पुणे आरटीओ ने लग्जरी गाड़ी पोर्स के मालिक को नोटिस भेजा है। इसी गाड़ी ने नाबालिग द्वारा एक्सीडेंट हुआ था। नोटिस में पूछा गया है कि मार्च 2024 में गाड़ी को जारी किए गए टेम्पोररी नंबर को रद्द क्यों नहीं किया गया, जब गाड़ी को बेंललुरु आरटीओ से खरीदा गया था। इस नंबर को एक्सीडेंट के फौरन बाद रद्द कर दिया जाना चाहिए था।
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