नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बृह्नमुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर उबाल देखने को मिल रहा है। रविवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने संयुक्त रैली कर राजनीतिक माहौल को और तीखा कर दिया। रैली में राज ठाकरे ने हिंदी भाषा और बाहरी राज्यों से आए लोगों को लेकर आक्रामक तेवर दिखाए, जिससे विवाद और चर्चा दोनों तेज हो गईं। वहीं, उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधते हुए उसे महाराष्ट्र और मुंबई के हितों के खिलाफ बताया। 15 जनवरी को होने वाले BMC चुनाव से पहले ठाकरे भाइयों की यह साझा मंच से हुंकार राज्य की राजनीति में बड़े संकेत के तौर पर देखी जा रही है।
हिंदी और अप्रवास पर राज ठाकरे की सख्त चेतावनी
रैली में बोलते हुए राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले लोगों को लेकर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हिंदी यूपी और बिहार के लोगों की मातृभाषा नहीं है और अगर महाराष्ट्र में हिंदी को जबरन थोपा गया, तो वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। राज ने कहा, मुझे किसी भाषा से नफरत नहीं है, लेकिन जब भाषा और जमीन दोनों छीनी जाने लगें, तो मराठी मानुष को जागना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ तो हम लात मारकर बाहर करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोग महाराष्ट्र आकर यहां के संसाधनों और अवसरों पर कब्जा कर रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों का हक छीना जा रहा है।
”मराठी मानुष के लिए आखिरी चुनाव”
राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव को मराठी अस्मिता से जोड़ते हुए इसे “मराठी मानुष के लिए आखिरी चुनाव” बताया। उन्होंने कहा कि अगर अब भी मराठी लोग एकजुट नहीं हुए तो भविष्य में उनकी पहचान और अधिकार दोनों खतरे में पड़ जाएंगे। उन्होंने मुंबई के इतिहास और बलिदानों का जिक्र करते हुए कहा कि यह शहर कई संघर्षों के बाद मिला है और इसकी रक्षा करना जरूरी है।
कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश
राज ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को मतदान के दिन सतर्क रहने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) सुबह से ही अलर्ट रहें और किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त न करें। उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
उद्धव ठाकरे का भाजपा पर हमला
राज ठाकरे के बाद मंच संभालते हुए उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा मुंबई का नाम बदलकर फिर से ‘बंबई’ करना चाहती है। इसके लिए उन्होंने तमिलनाडु भाजपा नेता के. अन्नामलाई की टिप्पणियों का हवाला दिया।
उद्धव ने भाजपा पर चुनाव से पहले समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा का हिंदुत्व और राष्ट्रवाद “नकली” है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अब राष्ट्रहित से ज्यादा भ्रष्टाचार को प्राथमिकता देने वाली पार्टी बन चुकी है।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी
बीएमसी चुनाव से पहले ठाकरे बंधुओं की यह साझा रैली साफ संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और ज्यादा आक्रामक होने वाली है। भाषा, पहचान और स्थानीय अधिकार जैसे मुद्दे एक बार फिर चुनावी बहस के केंद्र में आ गए हैं।





