नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र की सियासत में एक बड़ी हलचल मच गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आज की कैबिनेट बैठक में शिवसेना के मंत्री अनुपस्थित रहे। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब शिवसेना और बीजेपी के नेताओं के बीच जारी तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।
इस अनबन के कारणों पर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, और यह सियासी तकरार राज्य की राजनीति पर गहरा असर डालने की संभावना जताई जा रही है।
कैबिनेट की बैठक में नदारत रहे मंत्री?
शिवसेना और बीजेपी के बीच चल रही अनबन के बीच आज कैबिनेट की बैठक में एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में केवल उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और संजय शिरसाठ ही मौजूद रहे, जबकि शिवसेना के अन्य मंत्री मंत्रालय तो पहुंचे, लेकिन बैठक में भाग नहीं लिया।
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की बैठक के बाद शिवसेना के सभी मंत्री मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे, जिससे इस सियासी उठापटक को लेकर नया मोड़ देखने को मिल सकता है।
मंत्रियों की नाराजगी पर सीएम का जवाब
शिवसेना के मंत्रियों की नाराजगी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सफाई दी है। उन्होंने कहा, “शिवसेना के सभी मंत्री नहीं, बल्कि कुछ ही मंत्री आज की कैबिनेट बैठक में शामिल हुए थे।”
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बैठक के बाद शिवसेना के मंत्रियों ने उनसे मुलाकात की और डोंबिवली में हुई घटना को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में और सियासी खींचतान को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है।
शिवसेना के मंत्रियों की नाराजगी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जोरदार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “उल्हासनगर में शुरुआत आप लोगों ने ही की थी। अब अगर बीजेपी वही कदम उठाती है, तो उसे गलत ठहराना ठीक नहीं है।
आप जो करेंगे, वह सही है और हम जो करेंगे, वह गलत ऐसा नहीं चल सकता।” मुख्यमंत्री का यह बयान सियासी तकरार को और तेज कर सकता है, क्योंकि इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बढ़ती खींचतान राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का स्पष्ट रुख
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर और भी स्पष्टता दी, जब उन्होंने कहा, “अब से किसी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक-दूसरे के इलाके में प्रवेश नहीं देने दिया जाएगा। यह नियम दोनों पार्टियों को समान रूप से पालन करना होगा।”
मुख्यमंत्री का यह संदेश सीधे तौर पर शिवसेना और बीजेपी दोनों के कार्यकर्ताओं को चेतावनी देता है, ताकि राज्य में कोई और सियासी हलचल न हो और शांति बनाए रखी जा सके। इस बयान से यह साफ है कि आगे किसी भी तरह की पार्टी विरोधी गतिविधि को सख्ती से रोका जाएगा।
गठबंधन की स्थिरता पर खतरा
खबरों के मुताबिक, स्थानीय निकाय चुनाव की राजनीति और दबाव तंत्र के चलते शिवसेना के मंत्रियों में नाराजगी गहरी हो गई है। इस बीच, सवाल यह उठता है कि बीजेपी अब शिवसेना को कैसे मनाती है, क्योंकि दोनों दलों के बीच बढ़ते मतभेद महायुति (संपर्कित गठबंधन) के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। अगर ये खाई और चौड़ी होती है, तो न केवल गठबंधन की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है, बल्कि आगामी चुनावों में भी यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि बीजेपी और शिवसेना के नेतृत्व इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं।
गठबंधन की एकजुटता पर फिर दरार?
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन (बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी) के बीच दरारें सामने आने लगी हैं। आज की कैबिनेट बैठक में शिंदे गुट का कोई भी मंत्री मौजूद नहीं था, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह घटनाक्रम खासतौर पर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद होने की आशंका जताई जा रही है।
शिंदे गुट, जो हमेशा अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए जाना जाता है, इस बार भी अपनी स्थिति को लेकर सतर्क है। अब यह देखना होगा कि यह सियासी खींचतान गठबंधन को जोड़ने की बजाय, अलगाव की ओर बढ़ती है या फिर सुलझा लिया जाता है।





