नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ी उठा पटक जारी है। सभी की निगाहें एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासी हलचल पर टिकी हुई हैं। डेढ़ साल पहले दो धड़ों में बंटी शिवसेना में छिड़ी कानूनी लड़ाई अब अपने अंजाम के करीब पहुंचती नजर आ रही है। आज महाराष्ट्र सरकार में स्पीकर राहुल नार्वेकर को दल-बदल के खिलाफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित 16 शिवसेना विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर फैसला लेना है। इसको लेकर एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव खेमे के बीच रस्साकशी जारी है। ऐसे में दोनों ही दलों के लिए यह दिन बेहद खास है।
दलबदल कानून के तहत स्पीकर नार्वेकर को लेना है फैसला
आपको बता दें कि उद्धव गुट ने पहले 16 विधायकों और बाद में 24 विधायकों के खिलाफ एक्शन की मांग की थी। इसलिए यह फैसला सभी 40 विधायकों पर लागू होगा। दलबदल कानून के तहत अगर स्पीकर नार्वेकर सीएम शिंदे सहित 16 विधायकों को अयोग्य ठहरा देते हैं तो महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार पर संकट गहरा सकता है। फिर शिंदे को मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। वहीं, शिंदे गुट ने भी अयोग्यता को चुनौती दी थी और उद्धव गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए पत्र लिखा था। फिलहाल, आज स्पीकर नार्वेकर को किसी एक पक्ष में फैसला लेना होंगा। चूंकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं। ऐसे में अगर शिंदे गुट योग्य ठहराया जाता है तो उद्धव खेमा अयोग्य घोषित हो जाएगा और अगर शिंदे गुट अयोग्य हो जाता है तो उद्धव गुट को योग्य मान लिया जाएगा। अयोग्य विधायकों के पद भी रद्द हो जाएंगे। ऐसे में आइए विधानसभा के आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि महाराष्ट्र में सत्ता का खेल किस करवट बैठने जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवेसना ने एक साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। जिसके बाद नतीजे उनके पक्ष में आए थे, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी को दोने दलो में विवाद के बाद यह गठबंधन टूट गया। शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी की सरकार बना ली और उद्धव ठाकरे को इसका मुख्यमंत्री बना दिया गया। इसके करीब ढाई साल बाद जून 2022 में एकनाथ शिंदे के अगुवाई में शिवसेना के 15 विधायकों ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह कर दिया। शिवसेना के 15 विधायकों के साथ 20 जून 2022 को शिंदे ने पहले सूरत और फिर गोवहाटी पहुंच कर डेरा जमा लिया। 23 जून 2022 को शिंदे ने 35 विधायकों के समर्थन का लेटर जारी कर शिवसेना को दो फाड़ करने का मन बना लिया।
एकनाथ शिंदे बीजेपी के समर्थन से बने थे मुख्यमंत्री
इसके बाद शिवसेना दो धड़ों में बट गई और उद्धव ठाकरे ने सदन में बहुमत साबित करने से पहले इस्तीफा दे दिया। 30 जून 2022 में एकनाथ शिंदे बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए। शिंदे और उद्धव ठाकरे गुटों ने दलबदल विरोधी कानूनों के तहत एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में क्रॉस याचिकाएं दायर कर दी। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है और इसके बाद फैसला दिया कि स्पीकर शिंदे सहित 16 शिवसेना विधायकों पर फैसला लें। हलांकि इसके पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता पर विधानसभा स्पीकर 31 दिसंबर तक फैसला लें। और अगर स्पीकर के पास समय नहीं है तो हम फैसला देंगे। लेकिन इसके बाद 15 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने अवधि को बढ़ाकर फैसला सुनाने के लिए 10 जनवरी का समय तय कर दिया। आखिरकार वो तारीख बुधवार को आ गई है जब स्पीकर नार्वेकर को अपना फैसला लेना है, जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं। स्पीकर नार्वेकर ने अपना फैसला सुनाने की डेडलाइन से पहले महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे से दो बार मुलाकात की, जिसके बाद अब इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल है कि अगर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने आज शिंदे सहित 16 शिवसेना विधायकों को अयोग्य ठहराते हैं तो फिर क्या होगा?
विधानसभा चुनाव में होगा बड़ा असर
चुकी राज्य में कुछ ही महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में अगर एकनाथ शिंदे गुट को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है तो उद्धव खेमे की ताकत बढ़ना तय माना जा रहा है। इसका राजनीतिक लाभ भी उद्धव गुट को मिलेगा। उद्धव गुट की कोशिश रहेगी कि कुछ महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे को उठाया जाए और उसके बाद विधानसभा चुनाव में भी इसी मसले के बहाने बीजेपी और शिंदे को घेरा जाए।
शिवसेना बतौर चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ शिंदे गुट के पास
यदि शिंदे गुट स्पीकर की परीक्षा में पास हो गया। तो उद्धव ठाकरे गुट के हाथ कुछ नहीं लगेगा। क्योंकि चुनाव आयोग पहले ही शिंदे कैंप को असली शिवसेना बतौर चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ सौंप चुका है। अब यदी स्पीकर से भी निराशा हाथ लगी तो पार्टी के भी टूटने की आशंका है। इतना ही नहीं, आने वाले चुनाव में संगठन के सामने खुद को साबित करने के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। संभव है कि स्पीकर के फैसले के बाद कुछ विधायक भी उद्धव का साथ छोड़ सकते हैं। इसलिए उद्धव ठाकरे ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि स्पीकर का फैसला पक्ष में नहीं आता है तो वो सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती देंगे।
क्या है आंकड़ों का खेल?
महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। किसी पार्टी को बहुमत का आंकड़ा पाने के लिए 147 विधायकों के साथ की आवश्यकता होती है। एसे में यदि 16 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया गया तो सदन में विधायकों की संख्या 272 रह जाएगी। इसके बाद राज्य में सरकार बनाने के लिए 137 विधायकों के सपोर्ट की जरुरत होगी। महाराष्ट्र में अभी बीजेपी के पास 105, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पास 40 और अजीत पवार गुट के एनसीपी के पास 41 विधायक एक साथ सरकार में है। इसके अलावा निर्दलीय और अन्य पार्टी के 22 विधायक भी साथ है। इस तरह 208 विधायकों का समर्थन सरकार को मिली हुआ है।
वहीं, विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी की बात करें तो इसमें सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस जिसके पास 44 विधायकों की संख्या मौजुद है। उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना) के पास 16 विधायक हैं, जबकि शरद पवार की एनसीपी के पास 12 विधायक है। और महा विकास अघाड़ी के पास सपा के पास 2, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 1, शेतकरी कामगार पक्ष के 1, क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी के 1 और एक निर्दल विधायक का समर्थन प्राप्त है। इसके साथ असदुद्दी ओवैसी की पार्टी एमआईएम के 2 विधायक है जिन्होंने किसी का आपना समर्थन नहीं दिया है।
क्या होगा 16 विधायकों के अयोग्य ठहराए जाने के बाद?
महाराष्ट्र विधानसभा में सीटों के हिसाब शिंदे सरकार को 208 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में 16 विधायकों के अयोग्य ठहराए जाने की स्थिति में शिंदे गुट के 24 विधायक बचेंगे। बीजपी के साथ गठबंधन में बनी शिंदे सरकार को बीजेपी के 105, अजित पवार को 41, बहुजन विकास आघाडी के 3, प्रहार जनशक्ती पार्टी के 2 विधायक, राष्ट्रीय समाज पक्ष पार्टी का 1, जनसुराज्य शक्ति पार्टी के 1, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 1 और 13 निर्दल विधायकों को समर्थन प्राप्त है। इस तरह बहुमत साबित करने की स्थिति में ये शिंदे गुट का ही समर्थन करेंगे। ये आंकड़ा कुल 192 बैठता है जो बहुमत के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। ऐसे में सरकार पर खतरा नहीं है, लेकिन एकनाथ शिंदे को CM की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। यदि स्पीकर राहुल नार्वेकर 16 विधायकों को अयोग्य ठहराते हैं तो फिर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को तुरंत इस्तीफा देना होगा।
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