नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। करीब एक दशक की राजनीतिक दूरी को पाटते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) अध्यक्ष राज ठाकरे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के लिए हाथ मिलाने की तैयारी में हैं। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में ठाकरे बंधुओं का संयुक्त मोर्चा औपचारिक रूप से सामने आ सकता है, जिससे मुंबई की सियासत में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।
MaMu फैक्टर पर केंद्रित होगी रणनीति
इस संभावित गठबंधन की सबसे बड़ी रणनीतिक धुरी ‘MaMu’ यानी मराठी-मुस्लिम समीकरण होगा। मुंबई की 227 सीटों में से करीब 72 वार्ड मराठी बहुल और 41 मुस्लिम प्रभाव वाले माने जाते हैं। माना जा रहा है कि इसी सामाजिक समीकरण ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को गोवंडी, मानखुर्द, बायकुला और माहिम जैसे इलाकों में मजबूती दिलाई थी। अब बीएमसी चुनाव में इसी फॉर्मूले को और धार देने की तैयारी है।
सीट शेयरिंग फॉर्मूला लगभग तय
सीट बंटवारे के प्रारंभिक फॉर्मूले के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) 140 से 150 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि एमएनएस 60 से 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। हालांकि वर्ली, दादर-माहिम, सिवरी और विक्रोली-भांडुप जैसे चार मराठी गढ़ों को लेकर अब भी सहमति नहीं बन पाई है। एमएनएस इन इलाकों में अपनी मजबूत दावेदारी जता रही है, जबकि ये क्षेत्र पारंपरिक रूप से उद्धव ठाकरे की पार्टी के प्रभाव वाले माने जाते हैं।
उद्धव का अल्पसंख्यक फोकस, राज की मराठी अपील
रणनीति के तहत उद्धव ठाकरे अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधे रखने पर जोर देंगे, जबकि राज ठाकरे को मराठी अस्मिता और आक्रामक भाषणों के जरिए मराठी मतदाताओं को लामबंद करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह ‘भूमिका बंटवारा’ गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
तीन संयुक्त रैलियों से दिखेगी एकजुटता
ठाकरे बंधु अपनी एकता को सार्वजनिक रूप से दिखाने के लिए मुंबई में तीन संयुक्त रैलियों की योजना भी बना रहे हैं। इन रैलियों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश होगी कि बीएमसी चुनाव में मुकाबला सीधा ‘ठाकरे बनाम महायुति’ का है। माना जा रहा है कि अगले 48 घंटों में उद्धव और राज ठाकरे की अहम बैठक के बाद गठबंधन और साझा चुनावी रणनीति पर अंतिम मुहर लग सकती है।





