नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पुणे में नाबालिग द्वारा हुए एक्सीडेंट मामले में एक के बाद एक नया एंगल सामने आ रहा है। जहां पहले कहा जा रहा था कि एक्सीडेंट नाबालिग से हुआ है, वहीं नाबालिग ने दावा किया कि एक्सीडेंट के समय कार को ड्राइवर चला रहा था। मामले में पुणे आरटीओ ने नोटिस जारी कर पूछा है कि टेम्पोरेरी नंबर प्लेट के साथ चल रही गाड़ी को एक्सीडेंट के बाद जब्त क्यों नहीं किया गया। पुलिस भी सीसीटीवी की फुटेड खंगाल सभी सबूत जुटाने में लगी है। बता दें कि फिलहाल के लिए नाबालिग आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 5 जून तक ऑब्जर्वेशन में भेज दिया है। साथ ही आरोपी के पिता को हिरासत में लिया जा चुका है, जिस बार में आरोपी ने शराब पी, उसके मालिक को भी गिरफ्तार किया जा चुका गया है।
पुलिस पर आरोपी को बचाने का आरोप
जहां एक तरफ पुलिस सबूत जुटाने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस पर आरोप लग रहा है कि उनकी तरफ से नाबालिग आरोपी को बचाने की कोशिश हुई है। शुरुआती जांच के समय इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी नाबालिग आरोपी शराब का सेवन किया है या नहीं। इसलिए पुलिस बल्ड रिपोर्ट की तरफ बढ़ रही थी, तो वहीं पुणे पुलिस कमिश्नर बल्ड रिपोर्ट को लेकर कुछ और ही कह रहे हैं।
क्या बोले पुणे पुलिस कमिश्नर?
पहले पुलिस बल्ड रिपोर्ट की तरफ जोर दे रही थी। लेकिन पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने साफ लफ्जों में कहा कि ब्लड रिपोर्ट पुणे पुलिस के लिए जांच में इतने मायने नहीं रखती। उन्होंने कहा है कि आरोपी पूरी तरह होश में था। साथ ही कहा कि आरोपी को इस बात का एहसास था कि अगर वो शराब पीकर गाड़ी चलाएगा तो लोगों की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए कहा है कि मामले में कठोर से कठोर कार्रवाई के लिए सभी सबूतों को जुटाया जा रहा है।
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